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Monday, April 11, 2022

श्री जामडी पाटेश्वर धाम के संत राजयोगी बाबा पंचतत्व में लीन हुए।आगामी 19 अप्रैल को दशगात्र तथा आगामी 25 अप्रैल को षडोसी।

 श्री जामडी पाटेश्वर धाम के संत राजयोगी बाबा पंचतत्व में लीन हुए।आगामी 19 अप्रैल को दशगात्र तथा आगामी 25 अप्रैल को षडोसी। 




डौंडी लोहारा :-  स्थानीय श्री जामडी पाटेश्वर धाम की पहाड़ों में धुनि जमा कर तप करने वाले संत राजयोगी महाराज श्री रामजानकी दास महात्यागी 9 अप्रैल को 82 वर्ष की आयु में ब्रम्हलीन हो गए है। संतश्री का अंतिम संस्कार श्री जामडी पाटेश्वर  आश्रम में उनके उत्तराधिकारी संतश्री रामबालक दास महात्यागी द्वारा मुखाग्नि देकर किया गया।इस  अवसर पर  हजारों की संख्या में भक्तगण उपस्थित रहे। 



संतश्री रामजानकी दास महात्यागी के सभी संस्कार संत परंपरा के अनुसार सम्पन्न होंगे । आगामी 19 अप्रैल को दशगात्र सम्पन्न होगा । दशगात्र कार्यक्रम में  मुण्डन संस्कार में संत  राजयोगी महाराज श्री रामजानकी दास महात्यागी को मानने वाले अनुयायी तथा सैकडों  की संख्या में भक्तगण मुण्डन संस्कार में  सम्मिलित होंगे। संत परम्परा के अनुसार आगामी 25 अप्रैल को षोडसी संस्कार सपन्न होगा जिसमे देश भर से हजारों की संख्या में संतगण उपस्थित रहकर संत परंपरा के षोडसी कार्यक्रम में भाग लेंगे।

विकास खंड के श्री जामडी पाटेश्वर धाम की पहाड़ों में धुनि जमा कर तप करने वाले महात्यागी संत राम जानकी दास अब इस दुनिया में लौकिक रूप  नहीं रहे। 


उल्लेखनीय है कि  पीठाधिश्वर संत श्री  रामजानकी दास महात्यागी  छत्तीसगढ़ के ऐसे संत थे जिन्होंने श्री राम भगवान की जीवन भर सेवा की। महंत दिन रात भगवान श्री राम की सेवा में लीन रहते थे। कई वर्ष पूर्व साधना के लिए अकेले पाटेश्वर धाम के जंगलों में चले आये थे। जंगली जानवरों के बीच ही खुले पेड़ के नीचे निर्भीक होकर तप किया करते थे। उनकी दिव्य शक्ति और सेवाभाव भक्तिभाव से क्षेत्र के लोग इतने प्रभावित हुए की हर कार्य उनके सहमति से ही किया जाने लगा। बालोद जिला में सनातन धर्म व राम भगवान की गाथा को जन-जन तक व्यापक रूप में लाने में उनका प्रमुख योगदान माना जाता है। लेकिन यह भी अनोखा संयोग है कि संत ने जीवन भर श्री राम को पाने के लिए तप किया। अंत में भगवान श्री राम के जन्म दिन पर ही वे ब्रम्हलीन में विलीन हुए। संत बालक दास महात्यागी के गुरु रहे हैं।


राजयोगी बाबा के अंतिम संस्कार के दौरान अग्नि प्रजव्वलित होने के बाद संत रामबालक दास महात्यागी अपने गुरु के ब्रम्हलीन होने के कारण अग्नि संस्कार के समय कुछ समय के लिए मूर्छित हो गए। उपस्थित संतो ने संत रामबालक दास महात्यागी को संभाला और उन्हें धैर्यता से गुरु परम्परा का निर्वहन के लिए तैयार किया।


श्री जामडी पाटेश्वर धाम के संत रामबालक दास महात्यागी ने पूरे देश भर के भक्त समुदाय से अपील किया है कि आने वाले 19 अप्रैल को दशगात्र के अवसर पर  आयोजित विशाल मुण्डन संस्कार तथा आगामी 25 अप्रैल को आयोजित षोडसी कार्यक्रम में भी  सभी लोग शामिल रहे।क्योंकि 25 अप्रैल को आयोजित षोडसी कार्यक्रम में देश भर से सभी संतगण उपस्थित रहेंगे। 





CNI News डोंडी लोहारा से इस्लाम खान की रिपोर्ट

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