केश बिगाड़ पल्ला झाड़ रिफर करते नजर आते हैं लापरवाह डाॅक्टर।
सत्ताधारी जनप्रतिनिधियों व विपक्ष की पार्टी को नहीं कोई सारोकार।
छुरिया-ताहिर खान:- सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र छुरिया में रात को लाने वाले मरीज के परिजन हो जायें सावधान? क्षेत्र के इतने बड़े सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में डाॅक्टरों की लापरवाही व समय में ना मिलने के अभाव में खुद चल रहा अस्पताल बिमार? मामला भले गुरुवार के दिन का है लेकिन जो हुआ उसे बताना भी जरूरी है। इतने बड़े सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में डाॅक्टर इतने लापरवाह की मरीज रात को मामूली हरारत के चलते परिजन 108 की मदद से स्वास्थ्य विभाग के छुरिया सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया जाता है जहां अस्पताल में मरीज को देखने रात्रि आपातकालीन सेवा में पदस्थ केवल एक नर्स मरीज़ की हालात को देख रात्रि में पदस्थ डाॅक्टर को जानकारी देने पर मरीज़ को बगैर देखे गोली दवा के बारे में कहते हुए सुबह आने की बात कर डाॅक्टर सहाब अपने दुर स्थित सरकारी मकान सो गए। वहीं इस बारे में परिजनों ने जानना चाहा कि अकेली नर्स मरीज़ कि हालत को देखते हुए डाॅ. भाटिया को 3/4 बार फोन लगाने पर सहाब नींद जा चुके थे और मरीज़ की हालात बिगड़ते जा रही थी फिर आखिर में अस्पताल के बी.एम.ओ. डाॅ. वर्मा को भी फोन 3/4 बार लगाते लगाते समय यूंही बीतता जा रहा था हालांकि अस्पताल के करीब होते तो जाकर उठा भी लिया जाता किन्तु वे भी दुर स्थित सरकारी आवास मे सोने हुए थे आखिरकार 5 वें बार में फोन बी.एम.ओ. व्दारा फोन उठाया जहां मरीज़ की हालात को जानकर डाॅ. ने कहा मैं तत्काल भेजता हूं जिनकी ड्यूटी है रात को लेकिन हम क्या देखते हैं 5 से 10 मिनट की देरी में पहुंचने वाले डाक्टर लगभग एक से देढ़ घंटे बाद पहुंचे जिसके बाद क्या था आनन फानन में 2 घंटे बाद मरीज की हालत को देखते हुए राजनांदगांव जिला अस्पताल रिफर किया जाना बताया गया जो कि यह दुर्भाग्य की बात है। खैर जैसे भी परिजन जिला अस्पताल पेंड्री पहुंचे तत्काल सुबह 4 बजे डाॅक्टर मिलने पर ई.सी.जी. जांच में बता दिया गया वे मरीज़ महिला नहीं रहीं ऐसे में कसुरवार कौन जिला प्रशासन या वह डाॅक्टर जो समय रहते मरीज़ की हालात को देखते हुए नहीं पहुंच सके। ऐसे में कोई परिजन ईलाज न मिलने के अभाव में स्थानीय अस्पताल में हल्ला मचाये वो गलत है क्यों? जिला प्रशासन को चाहिए ऐसे लापरवाही बरतने वाले डाक्टरों कड़ी से कड़ी कार्यवाही करनी चाहिए जिससे भविष्य में समुचित इलाज के अभाव व डाक्टर के न मिलने से किसी को अपनी जान न गंवानी पड़े। वहीं ऐसी लापरवाही की शिकायत बहुत जल्द स्वास्थ्य मंत्री व मुख्यमंत्री से किये जाने की तैयारी है।




















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