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Tuesday, June 13, 2023

केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय भोपाल में हुआ डॉ.पीसी लाल यादव का सम्मान

 केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय भोपाल में हुआ डॉ.पीसी लाल यादव का सम्मान


रायपुर छत्तीसगढ़।  केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय भोपाल परिसर व अयोध्या शोध संस्थान संस्कृति विभाग उत्तरप्रदेश के सँयुक्त तत्वावधान में दिनांक 11 व 12 जून 2023 को राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया।जिसका विषय था "लोक परम्पराओं में श्रीराम"।


मुख्य अतिथि थीं माननीया साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर,सांसद भोपाल।अध्यक्षता की प्रो.रमाकांत पांडेय निदेशक केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय भोपाल ने।

वक्ता के रूप में पद्मश्री अभिराज राजेन्द्र मिश्र वाराणसी, डॉ.उमा शंकर पचौरी, डॉ.राधावल्लभ त्रिपाठी, डॉ.विकास दवे, बसंत निर्गुणे, डॉ.शैलेन्द्र शर्मा, डॉ.लवकुश द्विवेदी,व डॉ.पीसी लाल यादव के साथ ही देश के सभी प्रदेशों तथा लोकाँचलों से पधारे पचास विद्वानों ने       "लोक परम्पराओं में श्रीराम" विषय पर सारगर्भित शोध प्रस्तुत कर श्रीराम की महत्ता प्रतिपादित की।

              संस्कृत विश्वविद्यालय के भवभूति प्रेक्षागार में डॉ. मिथिला प्रसाद त्रिपाठी की अध्यक्षता में छत्तीसगढ़ के डॉ.पीसी लाल यादव ने छत्तीसगढ़ के लोक जीवन में श्रीराम की उपस्तिथि को दर्शाते हुए यहाँ के "रामनामी पंथ" पर महत्वपूर्ण शोध  प्रस्तुत किया।डॉ.यादव ने कहा कि रामनामी पंथ के अनुयायी अपने अंग-प्रत्यंग में नखशिख रामराम का गुदना गुदवाते हैं। रामराम अंकित वस्त्र पहनते हैं तथा सिर पर रामनामी मोर मुकुट लगाते हैं। राम के प्रति ऐसी भक्ति,तप-साधना और ऐसा समर्पण अन्यत्र दिखाई नहीं पड़ता। रायगढ़, सारंगढ़, बलौदाबाजार, जाँजगीर-चाम्पा, महासमुंद, रायपुर जिलों में महानदी के दोनों किनारों पर तीन सौ गावों में इनकी आबादी लगभग पाँच लाख है। रामनामियों का प्रमुख केंद्र उड़काकन है। रामनामी पंथ की स्थापना सन 1904 में मालखरौदा विकासखण्ड के चारपारा निवासी स्व.परसराम भारद्वाज ने की थी। रामनामी दशरथ के पुत्र  राम की नहीं , बल्कि निर्गुण निराकार ब्रह्म के प्रतीक राम की पूजा करते हैं।   सभी विद्वानों ने डॉ.यादव के शोधपूर्ण  व्याख्यान की प्रशंसा की। इसी कड़ी में श्रीमती राधा यादव ने श्रीराम से सम्बंधित पारंपरिक छत्तीसगढ़ी विवाह गीत गाकर खूब तालियाँ बटोरीं।

       इस राष्ट्रीय शोध संगोष्ठी में केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय भोपाल द्वारा डॉ.पीसी लाल यादव का शाल श्रीफल, स्मृति चिन्ह व पौधा भेंट कर सम्मान किया गया। भेंट किया गया पौधा विश्वविद्यालय परिसर के नक्षत्र वाटिका में रोपित किया जाएगा।

      उल्लेखनीय है कि डॉ पीसी लाल यादव छत्तीसगढ़ी लोककला,लोक साहित्य व लोक संस्कृति के क्षेत्र में  निरंतर शोधरत हैं और अब तक इनकी तीन दर्जन से अधिक पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं। इस उपलब्धि पर अनेक साहित्यकारों, लोक कलाकारों व इष्ट-मित्रों ने डॉ.यादव को बधाइयाँ देकर शुभकामनाएं प्रेषित की हैं।

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