किसान हनुमान संकट मोचन दक्षिणमुखी मंदिर की भव्य प्राण प्रतिष्ठा सम्पन्न
खैरागढ़। छुईखदान के विचारपुर–पंडरिया भाठा में गुरुवार का दिन इतिहास के पन्नों में दर्ज हो गया, जब आस्था, एकता और संघर्ष का अद्भुत संगम देखने को मिला। किसान हनुमान संकट मोचन दक्षिणमुखी मंदिर की भव्य प्राण प्रतिष्ठा ने न केवल धार्मिक वातावरण को दिव्यता से भर दिया, बल्कि 55 गांवों के किसानों की सामूहिक शक्ति और संकल्प को भी नई पहचान दी।
सुबह की पहली किरण के साथ ही श्रद्धा का महासागर उमड़ पड़ा। भगवान हनुमान की भव्य प्रतिमा को ओटेबंद से बाजे-गाजे और जयकारों के बीच पंडरिया लाया गया।
पूरे क्षेत्र में “जय श्री राम” और “हनुमान जी की जय” के उद्घोष गूंजते रहे। इसके बाद निकली करीब डेढ़ किलोमीटर लंबी कलश यात्रा ने आयोजन को और भी अलौकिक बना दिया। पारंपरिक वेशभूषा में सजी 1500 से अधिक महिलाओं ने सिर पर कलश धारण कर जिस श्रद्धा और अनुशासन के साथ भाग लिया, उसने इस आयोजन को सांस्कृतिक गरिमा से भर दिया।
करीब 5 फीट ऊंची और लगभग 7 क्विंटल वजनी हनुमान प्रतिमा को क्रेन की सहायता से गर्भगृह में स्थापित किया गया। विधि-विधान, मंत्रोच्चार और वैदिक रीति से मुख्य यजमान गिरवर जंघेल, लुकेश्वरी जंघेल और वीरेंद्र जंघेल ने प्राण प्रतिष्ठा संपन्न कराई। उस क्षण का साक्षी बना हर व्यक्ति भाव-विभोर हो उठा—मानो पूरे क्षेत्र में नई ऊर्जा का संचार हो गया हो।
लेकिन यह आयोजन केवल धार्मिक अनुष्ठान तक सीमित नहीं रहा। प्राण प्रतिष्ठा के तुरंत बाद विशाल किसान महापंचायत का आयोजन हुआ, जिसने इस पूरे कार्यक्रम को एक ऐतिहासिक जनआंदोलन का रूप दे दिया। 10 हजार से अधिक किसानों की उपस्थिति और उनमें लगभग आधी संख्या महिलाओं की भागीदारी ने यह स्पष्ट कर दिया कि यह संघर्ष केवल पुरुषों का नहीं, बल्कि पूरे समाज का है। 22 हजार वर्गफीट में बने विशाल पंडाल में जनसैलाब उमड़ पड़ा, जहां हर वर्ग, हर समाज और हर गांव की आवाज एक साथ गूंजी।
महापंचायत में लिए गए तीन बड़े फैसलों ने किसानों के इरादों को और मजबूत कर दिया। किसानों ने एक स्वर में कहा कि वे किसी भी प्रकार की धमकी या दबाव के आगे नहीं झुकेंगे। जब तक प्रस्तावित सीमेंट फैक्ट्री को रद्द नहीं किया जाता, उनका आंदोलन जारी रहेगा। साथ ही, पोला तिहार पर इसी स्थल पर अगली महापंचायत आयोजित करने और पारंपरिक बैल दौड़ व गेड़ी दौड़ का आयोजन करने का निर्णय लिया गया—जो उनकी संस्कृति और संघर्ष दोनों का प्रतीक होगा।
किसान अधिकार संघर्ष समिति के संरक्षक गिरवर जंघेल ने बताया कि इस आयोजन की एक और खास बात रही सर्वसमाज की भागीदारी। साहू, लोधी, यादव , निषाद , सतनामी, आदिवासी समाज सहित विभिन्न समाजों के अध्यक्ष एवं प्रमुखों और जनप्रतिनिधियों की सक्रिय उपस्थिति ने यह संदेश दिया कि यह आंदोलन किसी एक वर्ग का नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र की सामूहिक आवाज है। समाज अध्यक्ष तिलेश्वर , उत्तम जंघेल, विशेषर दास साहू,चंद्रशेखर यादव, नीना ताम्रकार,दशमत जंघेल, गिरिराज किशोर दास वैष्णव, विनोद ताम्रकार,राजकुमार जंघेल, डॉ नेतराम जंघेल, प्रेमलाल जंघेल सहित बड़ी संख्या में समाज और जन प्रतिनिधियों की उपस्थिति रही l वहीं हजारों लोगों ने भंडारे में प्रसाद ग्रहण किया, जो सामाजिक समरसता और एकजुटता का जीवंत उदाहरण बना।
अध्यक्ष लुकेश्वरी जंघेल ने बताई कि यह मंदिर अब केवल पूजा-अर्चना का स्थल नहीं रहा, बल्कि किसानों के संघर्ष का प्रतीक बनकर उभरा है। प्रस्तावित श्री सीमेंट फैक्ट्री के विरोध में चल रहे आंदोलन को इस आयोजन ने नई धार दी है। किसानों का मानना है कि यह मंदिर उनकी आस्था के साथ-साथ जल, जंगल और जमीन की रक्षा के संकल्प का केंद्र है। 55 गांवों की एकता अब पहले से कहीं अधिक मजबूत हो चुकी है।
हालांकि, आयोजन से पहले मंदिर निर्माण को लेकर सरकारी जमीन पर विवाद भी सामने आया था। पटवारी द्वारा मौके का निरीक्षण किया गया, लेकिन किसानों ने अपने इरादे साफ कर दिए थे—“मंदिर निर्माण हर हाल में होगा।” अंततः उनका दृढ़ संकल्प ही उनकी सबसे बड़ी ताकत साबित हुआ और हजारों लोगों की मौजूदगी में यह ऐतिहासिक आयोजन सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। कार्यक्रम में किसान अधिकार संघर्ष समिति के संरक्षक गिरवर जंघेल, मोतीलाल जंघेल, अध्यक्ष लुकेश्वरी जंघेल, संयोजक सुधीर गोलछा, सचिव प्रियंका जंघेल, सहित अन्य पदाधिकारी प्रमोद सिंह, मुकेश पटेल, मन्नू चंदेल, श्रवण जंघेल, संजू चंदेल, बीरेंद्र जंघेल, विष्णु मंडल, सौरभ जंघेल, विक्रम मनोहर यादव, ज्ञानेंद्र जंघेल, लक्की जंघेल, सहित २५ से अधिक सरपंच एवं उनके प्रतिनिधि उपस्थित थे ल
आज यह स्थल केवल एक मंदिर नहीं, बल्कि आस्था, संघर्ष और एकता का जीवंत प्रतीक बन चुका है। संयोजक सुधीर गोलछा ने महापंचायत में गूंजे संकल्प की आवाज अब दूर तक सुनाई दे रही है—एक ऐसी आवाज, जो किसानों के हक, उनकी जमीन और उनके अस्तित्व की रक्षा के लिए लगातार बुलंद होती रहेगी।




















No comments:
Post a Comment
Please do not enter any spam link in the comment box.