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Friday, June 26, 2026

नल जल योजना अधर में, तीन माह से बंद सोलर पंप; नदी का पानी ढोने को मजबूर आदिवासी ग्रामीण

 नल जल योजना अधर में, तीन माह से बंद सोलर पंप; नदी का पानी ढोने को मजबूर आदिवासी ग्रामीण




भोपालपटनम/बीजापुर। केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी जल जीवन मिशन (नल-जल योजना) का उद्देश्य देश के प्रत्येक घर तक शुद्ध पेयजल पहुंचाना है। इसी लक्ष्य को लेकर केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हैं ताकि ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को घर-घर नल कनेक्शन के माध्यम से स्वच्छ पानी उपलब्ध हो सके। 




कई क्षेत्रों में इस योजना का लाभ लोगों तक पहुंच भी रहा है, लेकिन बीजापुर जिले के कुछ गांवों में यह योजना अभी भी अधूरी पड़ी हुई है, जिससे ग्रामीणों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

बीजापुर जिले के भोपालपटनम ब्लॉक अंतर्गत ग्राम पंचायत अटूकपल्ली के पटेलपारा में दो वर्ष पूर्व नल-जल योजना के तहत पाइपलाइन बिछाने और घरों तक नल कनेक्शन देने का कार्य किया गया था। ग्रामीणों का कहना है कि नल तो लगा दिए गए, लेकिन आज तक उन्हें मुख्य जलापूर्ति लाइन से नहीं जोड़ा गया। परिणामस्वरूप योजना का लाभ लोगों तक नहीं पहुंच पाया और करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद ग्रामीणों को पेयजल के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है।

ग्रामीणों के अनुसार, अब तक वे गांव में स्थापित सोलर पंप के माध्यम से पानी की व्यवस्था कर रहे थे, लेकिन यह सोलर पंप भी पिछले तीन महीनों से बंद पड़ा हुआ है। कई बार संबंधित विभागों को सूचना देने के बावजूद मरम्मत के लिए कोई अधिकारी या कर्मचारी गांव नहीं पहुंचा। मजबूरी में ग्रामीण, विशेषकर महिलाएं, प्रतिदिन इंद्रावती नदी से पानी लाकर अपने परिवार की जरूरतें पूरी कर रही हैं।

मीडिया टीम जब गांव पहुंची और ग्रामीणों से चर्चा की तो उन्होंने बताया कि तीन महीने से अधिक समय से पेयजल संकट बना हुआ है। गांव ब्लॉक मुख्यालय से मात्र 10 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है, फिर भी समस्या का समाधान नहीं हो पा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि मुख्यालय के इतने नजदीक बसे गांव की यह स्थिति है, तो दूरस्थ गांवों की हालत का सहज अंदाजा लगाया जा सकता है।

ग्रामीणों ने बताया कि पानी लाने में महिलाओं का अधिकांश समय व्यतीत हो जाता है। सुबह से शाम तक पानी की व्यवस्था में लगे रहने के कारण वे अन्य घरेलू और आर्थिक कार्यों पर पर्याप्त ध्यान नहीं दे पा रही हैं। इससे उनकी दिनचर्या और आजीविका दोनों प्रभावित हो रही हैं।

ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि नल-जल योजना का अधूरा कार्य जल्द पूरा कराया जाए तथा बंद पड़े सोलर पंप की तत्काल मरम्मत कराई जाए। उनका कहना है कि बरसात का मौसम शुरू होने वाला है और बारिश के दौरान नदी से पानी लाना और भी कठिन तथा जोखिम भरा हो जाएगा। यदि समय रहते व्यवस्था नहीं की गई तो ग्रामीणों की परेशानियां और बढ़ सकती हैं।

इस संबंध में ग्राम पंचायत अटूकपल्ली के सरपंच यालाम सुरेश से दूरभाष पर संपर्क करने पर उन्होंने बताया कि उन्हें इस समस्या की जानकारी नहीं थी। उन्होंने कहा कि वे तत्काल संबंधित अधिकारियों और क्रेडा विभाग से चर्चा कर सोलर पंप की मरम्मत एवं समस्या के समाधान का प्रयास करेंगे।

वहीं, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी (पीएचई) विभाग के अधिकारियों ने बताया कि नल-जल योजना के तहत पाइपलाइन बिछाने की प्रक्रिया पूरी हो चुकी थी, लेकिन ठेकेदार द्वारा कार्य बीच में छोड़ दिए जाने के कारण योजना अधूरी रह गई। विभाग के अनुसार कार्य पूरा करने के लिए दूसरे ठेकेदार को जिम्मेदारी सौंपी गई है, लेकिन उसने भी अभी तक काम प्रारंभ नहीं किया है। अधिकारियों ने आश्वासन दिया कि जल्द ही अधूरे कार्य को पूरा कराया जाएगा। साथ ही सोलर पंप की खराबी की जानकारी क्रेडा विभाग को देकर सुधार कार्य कराने की बात भी कही गई है।

क्षेत्रवासियों ने क्रेडा विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि विभाग केवल सोलर पंप स्थापित कर अपनी जिम्मेदारी पूरी मान लेता है, जबकि उनकी नियमित निगरानी और रखरखाव की भी जिम्मेदारी तय होनी चाहिए। ग्रामीणों का कहना है कि ब्लॉक क्षेत्र में लगे सोलर पंपों की स्थिति की समय-समय पर समीक्षा होनी चाहिए ताकि खराब होने पर तत्काल मरम्मत की जा सके।

अब सवाल यह है कि करोड़ों रुपये की लागत से संचालित योजनाओं का लाभ आखिर ग्रामीणों तक कब पहुंचेगा। नल कनेक्शन होने के बावजूद पानी नहीं मिलना और सोलर पंप महीनों से बंद पड़े रहना सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है। ग्रामीणों को उम्मीद है कि जिला प्रशासन और संबंधित विभाग इस समस्या को गंभीरता से लेते हुए जल्द समाधान सुनिश्चित करेंगे, ताकि उन्हें पेयजल जैसी बुनियादी आवश्यकता के लिए संघर्ष न करना पड़े।

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