छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग द्वारा रायगढ़ जनसुनवाई दिनांक 06/07/26 में पारित हुआ डबल आदेश/निर्णय अब सवालों के घेरे में
बिलाईगढ़। आवेदिका रामकुवंर सारथी, संतोषी सारथी व अन्य 10 महिलाओं के द्वारा सुशील चौधरी मुख्य नगर पालिका अधिकारी नगर पंचायत बिलाईगढ़ के विरुद्ध दिनांक 30/07/25 को किए गए शिकायत के संबंध में छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग द्वारा रायगढ़ जनसुनवाई दिनांक 06/07/26 को दो अलग-अलग आदेश निर्णय पारित किया गया है जो इस प्रकार है—
प्रथम ऑर्डरशीट नस्ती क्र. 20 दिनांक 06/07/26
(1) आवेदकगण द्वारा अनावेदक के खिलाफ कार्य स्थल में लैंगिक उत्पीड़न की गंभीर शिकायत की है। ऐसी दशा में अनावेदक के खिलाफ I.C.C. कमेटी के जांच होने तक अनावेदक को निलंबित किए जाने की अनुशंसा की जाती है। कलेक्टर सारंगढ़ को अनावेदक के खिलाफ कार्यस्थल पर लैंगिक उत्पीड़न हेतु जांच के लिए 2 माह का समय दिया जाता है। व जांच पूर्ण होने तक अनावेदक को निलंबित करने की को कहा गया।
आवेदक को आज के आर्डरशीट की निःशुल्क प्रति दी जाती है। जिसे ले जाकर कलेक्टर के पास जाकर जांच हेतु दी जाएगी अतः प्रकरण नस्तीबद्ध किया जाता है।
(प्रथम ऑर्डरशीट में माननीय अध्यक्ष महोदय किरणमयी नायक, सदस्य सरला कोसरिया की हस्ताक्षर व कृ.पृ.उ.निशुल्क सत्यापित प्रतिलिपि प्रभारी लिखा हुआ सील मोहर हस्ताक्षर है तथा आवेदिकाओं रामकुंवर, रानी, लक्ष्मी, सरोजनी, गंगा, सेवंती की क्रमबद्ध हस्ताक्षर के बाद अन्य 2 की अंगूठा की निशान व आर्डरशीट की अंदर भाग में रेखा की अंगूठा निशान है)
द्वितीय ऑर्डरशीट नस्ती क्र.20 दिनांक 06/07/26
(2) अनावेदक सुशील चौधरी मुख्य नगर पालिका अधिकारी नगर पंचायत बिलाईगढ़ जिला सारंगढ़ बिलाईगढ़ छत्तीसगढ़ दिनांक 06/07/2026 को शाम 4:35 बजे उपस्थित हुआ उसने बताया कि उसके ऊपर लगाए गए संपूर्ण आरोप गलत है आवेदिकाओं से पूछने पर पता चला कि यह सभी महिलाएं मिशन क्लीन सिटी डोर टू डोर कचरा कलेक्शन का कार्य करती है अनावेदक ने बताया कि मेरा काम शहर की सफाई व्यवस्था को दुरुस्त रखना मेरा प्रमुख लक्ष्य होता है जब कभी शहर में साफ सफाई नहीं की जाती तब मैं सभी की मीटिंग लेकर उचित आदेश निर्देश देता हूं कई बार सफाई कर्मचारी से डांट कर एवं प्यार से काम करना पड़ता है यह सभी लोग जानबूझकर किसी बाहरी व्यक्ति के बहकावे में आकर मेरी शिकायत प्रत्येक फोरम में करती हैं जहां से मुझे क्लीन चिट प्राप्त हो चुकी है अनावेदक की जांच कलेक्टर बिलाईगढ़ द्वारा की गई थी जिसके जांच के उपरांत लगाई गई संपूर्ण शिकायत निराधार एवं झूठी पाई गई कलेक्टर का पत्रांक संख्या 339/अ.वि.अ./वा–/2025 है। इससे प्रतीत होता है लगाए गए सारे आरोप निराधार एवं झूठे है। अतः प्रकरण नस्तीबद्ध किया जाता है।
( द्वितीय ऑर्डरशीट में माननीय अध्यक्ष महोदया की सिंगल हस्ताक्षर है तथा कार्यालय छ.ग. राज्य महिला आयोग रायपुर (छ.ग.) की सील मोहर लगा है जिस पर किसी अन्य प्रभारी का हस्ताक्षर है। वही नोटशीट के दाहिना भाग में आवेदिका लिखा हुआ है और उसके नीचे में गंगा, सरोजनी की हस्ताक्षर के बाद 3 अंगूठा निशान है उसके बाद लक्ष्मी, रानी और सेवंती की हस्ताक्षर के नीचे में अनावेदक लिखा हुआ है जिसके नीचे में अनावेदक सुशील चौधरी का हस्ताक्षर है)
आरोप/सवाल :– (1) यदि सीएमओ सुशील चौधरी दिनांक 06/07/26 को 4.35 में रायगढ़ जनसुनवाई में उपस्थिति हुए और आयोग ने दोबारा आवेदक और अनावेदक का बयान लेकर द्वितीय ऑर्डरशीट आदेश पारित किया तो प्रथम ऑर्डरशीट को आवेदिकाओं से वापस लेकर निरस्त कर नए पारित ऑर्डरशीट आदेश की निःशुल्क प्रति महिलाओं को क्यों नहीं दिया?
(2) रायगढ़ जन सुनवाई में महिला आयोग की सदस्य सरला कोसरिया मौजूद थी तो उनके हस्ताक्षर क्यों नहीं है?
(3) रायगढ़ जनसुनवाई में कृ.पृ.उ. निःशुल्क सत्यापित प्रतिलिपि प्रभारी का सील मोहर मौजूद रहे, प्रभारी मौजूद रहे, तो प्रभारी के हस्ताक्षर व सील मोहर क्यों नहीं लगा?
(4) रामकुंवर वहां मौजूद थी तो द्वितीय ऑर्डरशीट में उनकी हस्ताक्षर क्यों नहीं? आवेदिकाओं की हस्ताक्षर व अंगूठे निशान प्रथम ऑर्डरशीट से मेल क्यों नि खा रहा है? दोनों ऑर्डरशीट की हैंड राइटिंग अलग अलग क्यूं है?
(5) सीएमओ के 4:35 में उपस्थिति के पश्चात व जनसुनवाई के पश्चात/दौरान ऐसा क्या स्थिति उत्पन्न हुई कि माननीय अध्यक्ष महोदया को द्वितीय ऑर्डरशीट में "कार्यालय छ.ग. राज्य महिला आयोग रायपुर (छ.ग.) वाली सील मोहर और नए प्रभारी के हस्ताक्षर के लिए रायपुर से सील और नए प्रभारी मंगवाना/बुलवाना पड़ा?
(6) आखिर मैडम अध्यक्ष महोदया सीएमओ के ऊपर इतना मेहरबान हुए क्यों? जो ऑर्डरशीट के साथ खुद के लेटरपैड में आदेश/क्लिनचिट संबंधी अलग से पत्र जारी करना पड़ा?
चलिए आपको बताते है द्वितीय ऑर्डरशीट आखिर कैसे जारी हुआ
दरअसल उक्त दिनांक को सीएमओ जनसुनवाई में उपस्थिति हुए ही नहीं (जिसे कलेक्टर कार्यालय रायगढ़ की सीसी टीवी कैमरा से स्पष्ट देखा जा सकता है)। जैसे ही सीएमओ को पता चला जांच और निलंबन आदेश पारित हुआ है उसके जमीन तले पैर खिसक गया। आनन फानन में उसने अपने आकाओं और चेला चपाठियों को लेकर रायपुर गया और वहां 2 दिन तक लगातार मंत्रियों के माध्यम से अध्यक्ष महोदया के ऊपर दबाव बनाने लगे। अंततः अध्यक्ष ने दबाव में आ गई और ये सोच कर आदेश बदलने पर मजबूर हो गई कि मैं तो जनसुनवाई दिनांक 06/07/26 को पदमुक्त हो गई हुं और सीएमओ सुशील चौधरी ने मोटी रकम भी दे रहा है और ऊपर से दबाव भी है तो बैक डेट यानी 06/07/26 में दूसरा ऑर्डरसीट/आदेश जारी करने में कौन सा बुराई है। इसलिए मैडम अध्यक्ष महोदय ने न्यायप्रणाली को ताक में रख कर सीएमओ के ऊपर मेहरबान हो कर अपने निज निवास या फिर रायपुर कार्यालय में ही बिना सदस्यों की सहमति के बगैर सिंगल हस्ताक्षर युक्त आदेश/क्लीन चिट पारित कर दी।
अध्यक्ष महोदया लेटरपेड की सच्चाई
अध्यक्ष महोदया के द्वारा जारी लेटरपैड जिसके ऊपर में दिनांक 08/07/26 अंकित है यानी लेटरपैड में अंकित दिनांक को ही क्लिन चिट संबंधी लेख किया गया है और लेख होने के बाद अध्यक्ष मैडम के समक्ष प्रस्तुत करने पर नीचे में मैडम ने हस्ताक्षर कर दी और दिनांक 06/07/26 (बैक डेट) लिख दी। ताकि लगे कि इसी दिनांक को जारी कि गई हो। स्पष्ट होता है कि दिनांक 08/07/26 को जारी किए गए क्लिनचिट कूटरचित, संदिग्ध एवं फर्जी है ।
SDM बिलाईगढ़ द्वारा जारी एकपक्षीय प्रतिवेदन एवं सीएमओ द्वारा आयोग को प्रस्तुत कलेक्टर प्रतिवेदन सवालों के घेरे में?
प्रेरणा स्वच्छता समूह दीदियों ने दिनांक 11/04/25 को कार्यालय कलेक्टर सारंगढ़–बिलाईगढ़ पहुंच कर सीएमओ सुशील चौधरी के विरुद्ध कार्यवाही बाबत आवेदन प्रस्तुत किया था जिसे कलेक्टर ने टी एल मीटिंग में रखा और SDM बिलाईगढ़ से प्रतिवेदन मंगाया। बिलाईगढ़ SDM वर्षा बंसल ने महिलाओं की बयान लिए बिना सीएमओ के द्वारा जिला समन्वयक शुभम नायक और सफाई प्रभारी बहादुर कहार से दबाव बना कर महिलाओं के विरुद्ध और अपने पक्ष में बनाए गए जवाब पत्र क्रमांक 1950 दिनांक 24/03/25 जिसे SDM वर्षा बंसल के समक्ष प्रस्तुत किया गया था को SDM वर्षा बंसल ने शुभम नायक और बहादुर कहार से लिखित जवाब मांगा किंतु महिलाओं से कुछ भी पूछताछ नहीं की और न ही बयान लेना जरूरी समझा। SDM ने शुभम नायक और बहादुर कहार के द्वारा प्रस्तुत जवाब दिनांक 08/04/25 को ही आधार मानकर टी एल 1728 को विलोपित करने पत्र क्रमांक 339 दिनांक 15/04/25 जारी किया गया था। जिसे कलेक्टर शिकायत शाखा को प्रेषित किया गया था। SDM वर्षा बंसल बिलाईगढ़ द्वारा जारी एकपक्षीय प्रतिवेदन को ही कलेक्टर का क्लिनचिट बताते हुए ढिंढोरा पीटा जा रहा है।
आपको यह भी बता दें कि–
(1 )छ.ग. राज्य महिला आयोग में आवेदन प्रस्तुत करने की तिथि — 30/07/25।
(2) महिला आयोग के द्वारा आवेदन को स्वीकार की तिथि: — नस्ती क्रमांक–20 दिनांक–01/08/25।
(3)आयोग के द्वारा प्रथम जन सुनवाई बिलासपुर की तिथि :— 10/03/26 ।
विचारणीय योग्य बातें
जब आयोग ने 10 मार्च 2026 को प्रथम जन सुनवाई की उस दिन सीएमओ ने क्लीन चिट संबंधी दस्तावेज प्रस्तुत क्यूं नहीं किए? जबकि SDM बिलाईगढ़ के द्वारा कलेक्टर शिकायत शाखा टी एल प्रकरण क्रमांक 1728 को विलोपित करने दिनांक 15/04/25 पत्र क्रमांक 339 जारी किया जा चुका था।
ये सब हम नहीं बल्कि आवेदकों ने स्वयं आरोप लगाई है। और ये भी कहा भी जब SDM वर्षा बंसल और महिला राज्य आयोग अध्यक्ष एक महिला हो कर इस तरह आरोपी को बचाने लगेंगे और पीड़ित महिलाओं को न्याय नहीं दिल सकते तो सरकार और न्यायप्रणाली से भरोसा किस पर करे। महिलाओं ने कलेक्टर, मुख्यमंत्री और राज्यपाल से निवेदन किया है कि उक्त मामले की उच्चस्तरीय की जांच कराए और दोषियों के ऊपर कड़ी से कड़ी कार्यवाही करें।



















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