प्रदोष व्रत आज- मान्यता है कि प्रदोष व्रत रखने से मोक्ष की प्राप्ति होती है, व्रत के प्रभाव से वैवाहिक सुख, संतान सुख,धन प्राप्ति होती है,एवं शत्रु ग्रह बाधा से मुक्ति मिलती है।
सी एन आइ न्यूज-पुरुषोत्तम जोशी।
हिन्दू धर्म के अनुसार, प्रदोष व्रत कलियुग में अति मंगलकारी और शिव कृपा प्रदान करनेवाला होता है। माह की त्रयोदशी तिथि में सायं काल को प्रदोष काल कहा जाता है। मान्यता है कि प्रदोष के समय महादेव कैलाश पर्वत के रजत भवन में इस समय नृत्य करते हैं और देवता उनके गुणों का स्तवन करते हैं। जो भी लोग अपना कल्याण चाहते हों यह व्रत रख सकते हैं। प्रदोष व्रत को करने से सब प्रकार के दोष मिट जाता है। सप्ताह के सातों दिन के प्रदोष व्रत का अपना विशेष महत्व है।
प्रदोष व्रत विधि के अनुसार दोनों पक्षों की प्रदोषकालीन त्रयोदशी को मनुष्य निराहार रहे। निर्जल तथा निराहार व्रत सर्वोत्तम है परंतु यदि यह सम्भव न हो तो नक्तव्रत करे। पूरे दिन सामर्थ्यानुसार हो सके तो कुछ न खाये नहीं तो फल ले। अन्न पूरे दिन नहीं खाना। सूर्यास्त के थोड़े से थोड़े 72 मिनट उपरान्त हविष्यान्न ग्रहण कर सकते हैं। शिव पार्वती जी का ध्यान करके पूजा करके। प्रदोषकाल में घी के दीपक जलायें। न्यूनतम एक अथवा 32 अथवा 100 अथवा 1000।
प्रदोष व्रत की तिथि
आषाढ़ कृष्ण प्रदोष व्रत रविवार, 12 जुलाई 2026
प्रदोष व्रत प्रारंभ: 12 जुलाई 2026, 02:04 AM तक
प्रदोष व्रत समाप्त: 12 जुलाई 2026 10:30 PM तक
प्रदोष व्रत की विधि-
1. प्रदोष व्रत वाले दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करने के बाद साफ कपड़े पहनने चाहिए।
2. व्रत के दिन भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करनी चाहिए।
3. पूजा के लिए शिवलिंग पर जल, दूध, दही, शहद, धूप, दीप और फूल अर्पित करना चाहिए।
4. इसके बाद भगवान शिव और माता पार्वती की आरती करनी चाहिए। आरती के बाद, व्रत का प्रसाद ग्रहण करना चाहिए।
5. प्रसाद में खीर का भोग लगाकर घर के छोटे बच्चों को बांट दें।
प्रदोष व्रत करने के महत्व-
1. मोक्ष -प्रदोष व्रत रखने से मोक्ष प्राप्त होता है।
2. पापों से मुक्ति - प्रदोष व्रत रखने से पापों से मुक्ति मिलती है।
3. सुख और समृद्धि - प्रदोष व्रत रखने से सुख और समृद्धि प्राप्त होती है।
4. रोगों से मुक्ति - प्रदोष व्रत रखने से रोगों से मुक्ति मिलती है।
5. आर्शीवाद - प्रदोष व्रत रखने से भगवान शिव और माता पार्वती का आर्शीवाद प्राप्त होता है।
सावन में प्रदोष व्रत रखने वालों पर शिव जी मेहरबान रहते हैं, इस व्रत में शिव पूजा प्रदोष काल में की जाती है। प्रदोष काल सूर्यास्त से लगभग 45 मिनट पहले शुरू होता है और 45 मिनट बाद तक मान्य होता है। धार्मिक मान्यता है कि प्रदोष काल में भगवान शिव कैलाश पर प्रसन्न मुद्रा में नृत्य करते हैं।


















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