सी एन आई न्यूज रिपोर्टर रमेश श्रीवास्तव पिथौरा 9977708864
पिथौरा के मीना बाजार में बड़े हादसे का इंतजार। सुरक्षा मानकों को ताक में रखकर संचालित हो रहा है मीना बाजार
पिथौरा। नगर में भगवान श्री जगन्नाथ रथयात्रा महोत्सव के अवसर पर लगाए गए मीना बाजार में सुरक्षा मानकों की खुलेआम अनदेखी किए जाने का मामला सामने आया है। प्रशासन से अनुमति प्राप्त होने के बावजूद मीना बाजार में संचालित कई झूलों की स्थिति बेहद जर्जर बताई जा रही है। स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि झूलों में लगे मोटर, घूमने वाले बेल्ट (पट्टे), लोहे के ढांचे और अन्य यांत्रिक उपकरण पुराने एवं असुरक्षित हैं, जिनके चलते कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है।
अनुमति तो मिली, लेकिन सुरक्षा ताक मे रखकर संचालित किया जा रहा है
उल्लेखनीय हो की सोशल मीडिया पर नगर पंचायत द्वारा जारी एक अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) वायरल हो रहा है। स्थानीय लोगों का दावा है कि उक्त पत्र में करीब 50 फीट ऊंचे हवाई झूले (आकाश झूला) का कहीं उल्लेख नहीं है, इसके बावजूद उसका संचालन किया जा रहा है। साथ ही आरोप लगाया जा रहा है कि संबंधित अधिकारियों ने स्थल का भौतिक निरीक्षण किए बिना कार्यालय में बैठकर ही अनुमति प्रदान कर दी। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि मीना बाजार को अनुमति दी गई है तो यह भी सुनिश्चित किया जाना चाहिए था कि सभी झूले तकनीकी रूप से सुरक्षित हों। सवाल उठ रहे हैं कि क्या झूलों का तकनीकी निरीक्षण किया गया? क्या मोटर, वायरिंग, बेल्ट, बोल्ट, फाउंडेशन तथा सुरक्षा उपकरणों की जांच किसी सक्षम अधिकारी द्वारा की गई, यदि जांच हुई है तो उसकी रिपोर्ट सार्वजनिक क्यों नहीं की जा रही है
निर्धारित क्षमता का भी नहीं हो रहा पालन
स्थानीय लोगों का कहना है कि मीना बाजार में संचालित अधिकांश झूलों पर उनकी अधिकतम क्षमता का कहीं भी स्पष्ट उल्लेख नहीं किया गया है। एक बार में कितने व्यक्ति झूले पर बैठ सकते हैं अथवा वह अधिकतम कितना भार वहन कर सकता है, इसकी जानकारी प्रदर्शित नहीं होने से क्षमता से अधिक लोगों को बैठाए जाने की आशंका बनी रहती है। विशेषज्ञों के अनुसार निर्धारित क्षमता से अधिक भार पड़ने पर झूले के यांत्रिक हिस्सों पर अतिरिक्त दबाव बढ़ जाता है, जिससे दुर्घटना की संभावना कई गुना बढ़ सकती है। नागरिकों ने प्रत्येक झूले पर उसकी निर्धारित क्षमता, सुरक्षा निर्देश और संचालन संबंधी जानकारी प्रदर्शित करने की मांग की है।
अग्नि एवं आपातकालीन सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल
मीना बाजार में आग लगने अथवा किसी अन्य आपात स्थिति से निपटने के लिए पर्याप्त व्यवस्था दिखाई नहीं दे रही है। स्थानीय लोगों का सवाल है कि क्या मौके पर अग्निशमन यंत्र, प्राथमिक उपचार और आपातकालीन चिकित्सा सहायता की व्यवस्था उपलब्ध है यदि कोई दुर्घटना होती है तो तत्काल राहत एवं बचाव कैसे किया जाएगा, इसे लेकर भी लोगों में चिंता बनी हुई है।
नागरिकों का कहना है कि अनुमति देना ही पर्याप्त नहीं
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि प्रशासन की जिम्मेदारी केवल अनुमति जारी करने तक सीमित नहीं है, बल्कि आम लोगों, विशेषकर बच्चों और महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करना भी उसका दायित्व है।
हाल की दुर्घटनाओं से भी नहीं लिया सबक
प्रदेश में हाल के वर्षों में मेलों और झूलों में कई दुर्घटनाएं सामने आ चुकी हैं, जिनमें तकनीकी खामियों और सुरक्षा मानकों की अनदेखी के कारण लोगों की जान जोखिम में पड़ी। इसके बावजूद यदि बिना समुचित परीक्षण के झूलों का संचालन कराया जा रहा है तो यह गंभीर लापरवाही मानी जाएगी। स्थानीय लोगों का कहना है कि पूर्व की घटनाओं से सबक लेने के बजाय प्रशासन वही पुरानी गलतियां दोहरा रहा है। वही मीना बाजार में प्रतिदिन बड़ी संख्या में बच्चे और परिवार पहुंच रहे हैं। ऐसे में जर्जर और संदिग्ध स्थिति वाले झूलों का संचालन सीधे-सीधे बच्चों की सुरक्षा से जुड़ा गंभीर विषय बन गया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते सभी झूलों का स्वतंत्र तकनीकी सुरक्षा ऑडिट नहीं कराया गया और आवश्यक कमियों को दूर नहीं किया गया तो किसी भी दिन बड़ा हादसा हो सकता है।



















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