सफलता की कहानी
भेड़ पालन से पशुपालक विद्याधर यादव को प्रतिवर्ष होता है 2 लाख की आमदनी
सारंगढ़ बिलाईगढ़, 23 अगस्त 2026/ पशुपालन पशुपालक परिवारों के लिए स्वरोजगार का मुख्य हिस्सा है। वह पशु धन को अपने खेती, दिनचर्या और रोजमर्रा जिंदगी में शामिल करते हैं। साथ ही प्रकृति के संवर्धन और संरक्षण में अपना हम अहम भूमिका निभाते हैं। इसी कड़ी में बरमकेला ब्लाक के देवगांव निवासी विद्याधर यादव और उनका परिवार भेड़ और गाय पालन कार्य से स्वरोजगार स्थापित किया है।
पशुधन विभाग के उप संचालक डॉक्टर महेंद्र कुमार पांडेय ने पशुपालक विद्याधर यादव से उनके घर में मुलाकात कर, पशुधन के रखरखाव का अवलोकन किया। पशुपालक यादव ने जानकारी दी कि उनके पास लगभग 70 भेड़ और एक गाय है। इन भेड़ो को चराने के दौरान देखरेख, अन्य कुत्तो और हिंसक पशुओ से रक्षा के लिए दो विदेशी नस्ल के कुत्ते भी पाला है। 1 गाय से दूध उत्पादन होता है। पशुपालन से प्रतिवर्ष 2 लाख की आमदनी हो जाती है, जिसमें 50 हजार का चारा और दो व्यक्ति को सुबह शाम चरवाहा के रूप में रखा है। पशुधन विभाग के कर्मचारी नियमित रूप से पशुओ का टीकाकरण करते हैं।
ग्रामीण अंचलों में आज भी पशुपालक के रूप में स्वरोजगार स्थापित किया जा सकता है। इसके लिए पूरे परिवार की इच्छा शक्ति और पशुधन के प्रति प्रेम होना जरूरी है। साथ ही पशु से संबंधित बीमारी के इलाज और रखरखाव की जानकारी रखना जरूरी है। पशुपालक विद्याधर यादव का पूरा परिवार पशुपालन से उन्नति की ओर निरंतर अग्रसर है।


















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