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Friday, October 2, 2026

एकीकृत कीट प्रबंधन (आई.पी.एम.) प्रशिक्षण, खरीफ 2025-26 के लिए दो दिवसीय मानव संसाधन विकास प्रशिक्षण कार्यक्रम सारंगढ़-बिलाईगढ़ में संपन्न जैविक उपायों और सुरक्षित कीटनाशक उपयोग पर किसानों को मिला विशेष मार्गदर्शन

 एकीकृत कीट प्रबंधन (आई.पी.एम.) प्रशिक्षण, खरीफ 2025-26 के लिए दो दिवसीय मानव संसाधन विकास प्रशिक्षण कार्यक्रम सारंगढ़-बिलाईगढ़ में संपन्न 



जैविक उपायों और सुरक्षित कीटनाशक उपयोग पर किसानों को मिला विशेष मार्गदर्शन



बिलाईगढ़। खरीफ 2026-27 के अंतर्गत दो दिवसीय मानव संसाधन विकास प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के वनस्पति संरक्षण, संगरोध एवं संग्रह निदेशालय के अंतर्गत केंद्रीय एकीकृत नाशीजीव प्रबंधन केंद्र, रायपुर तथा कृषि विभाग 




(सारंगढ़-बिलाईगढ़) के संयुक्त तत्वावधान में 28 एवं 29 सितंबर 2026 को उप संचालक कृषि कार्यालय, जिला सारंगढ़-बिलाईगढ़, (छत्तीसगढ़) में सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में लगभग 60 प्रतिभागियों ने भाग लिया, जिनमें प्रगतिशील किसान, महिला किसान, पेस्टीसाइड डीलर, किसान मित्र एवं कृषि विभाग के अधिकारी एवं कर्मचारी शामिल रहे। कार्यक्रम का उद्घाटन श्री आशुतोष श्रीवास्तव, उप परियोजना संचालक कृषि एवं डॉ. शिंगरे रिता प्रभाकरराव, वनस्पति संरक्षण अधिकारी (की.वि.), केंद्रीय एकीकृत नाशीजीव प्रबंधन केंद्र द्वारा किया गया, जबकि डॉ. आशीष जायसवाल एवं श्री वरुणेश कुमार, सहायक वनस्पति संरक्षण अधिकारी, श्री कन्हैया लाल मीना, वैज्ञानिक सहायक, श्री जय प्राकश गुप्ता, कृषि विकास अधिकारी ,वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी सारंगढ़-बिलाईगढ़ तथा विभागीय जमीनी  अस्तर पर जुड़े विभागीय कर्मचारी  की गरिमामयी उपस्थिति रही। प्रशिक्षण के दौरान डॉ. शिंगरे रिता प्रभाकरराव, ने किसानों को केंद्रीय एकीकृत नाशीजीव प्रबंधन केंद्र के कार्यों, उसकी उपयोगिता तथा धान एवं सब्जी फसलों में आईपीएम तकनीकों के महत्व के बारे में जानकारी दी। डॉ. आशीष जायसवाल ने किसानों को खेती में सांस्कृतिक, यांत्रिक एवं जैविक उपाय अपनाने पर जोर देते हुए रासायनिक दवाओं का प्रयोग केवल आवश्यकता अनुसार, अनुशंसित मात्रा में और पूरी सुरक्षा के साथ करने की सलाह दी तथा बीजोपचार के महत्व को सरल शब्दों में समझाया, जिससे बीज जनित रोगों की रोकथाम, बेहतर अंकुरण, मजबूत पौध और अधिक उत्पादन संभव होता है। उन्होंने यह भी बताया कि रासायनिक एवं जैविक बीजोपचार दोनों ही लाभकारी हैं और जैव उर्वरकों के प्रयोग से मिट्टी की उर्वरता बनी रहती है। इसी क्रम में श्री डॉ. कलेश कुमार पैकरा, विषय वस्तु विशेषज्ञ, कृषि विज्ञान केंद्र (के.व्ही.के.), रायगढ़ कृषि विज्ञान केंद्र के विषय वस्तु विशेषज्ञ ने किसानों का मार्गदर्शन करते हुए मिट्टी में उपस्थित सूक्ष्म पोषक तत्वों के महत्व पर विशेष प्रकाश डाला। उन्होंने मृदा में उर्वरकों (फर्टिलाईजर) के संतुलित उपयोग की विधि और उनकी सटीक मात्रा के बारे में विस्तार से चर्चा की। इसके साथ ही, डॉ. पैकरा ने पोषक तत्वों की कमी के कारण पौधों में दिखाई देने वाले विभिन्न लक्षणों और उनके कुप्रभावों के बारे में भी किसानों को विस्तारपूर्वक जानकारी दी। कार्यक्रम में उपस्थित सहायक वनस्पति संरक्षण अधिकारी श्री वरुणेश कुमार ने किसानों को धान की फसल में लगने वाले विभिन्न प्रकार के रोगों की पहचान करने के तरीके बताए और उनके वैज्ञानिक उपचार व प्रबंधन की जानकारी दी। इसके साथ ही, पौध संरक्षण अधिकारी डॉ. शिंगरे रिता प्रभाकरराव ने धान की फसल को नुकसान पहुँचाने वाले कीटों पर विस्तारपूर्वक चर्चा की और यह समझाया कि एकीकृत नाशीजीव प्रबंधन (आई.पी.एम.) विधि के द्वारा इन कीटों को प्रभावी ढंग से कैसे नियंत्रित किया जा सकता है।



    कन्हैया लाल मीना ने किसानों को एन.पी.एस.एस. मोबाइल एप के उपयोग तथा कीटनाशकों के सुरक्षित और संतुलित प्रयोग के बारे में समझाते हुए बताया कि दवाओं का अधिक या गलत उपयोग फसल, मिट्टी और पर्यावरण तीनों के लिए हानिकारक हो सकता है। कार्यक्रम के दौरान उपस्थित अधिकारियों ने किसानों को टिकाऊ खेती अपनाने, रसायनों पर निर्भरता कम करने, प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण और सुरक्षित खाद्यान्न उत्पादन के लिए प्रेरित किया। कार्यक्रम के अंत में किसानों ने उत्साहपूर्वक प्रश्न पूछे और यह विश्वास व्यक्त किया कि वे प्राप्त जानकारी और तकनीकों को अपने खेतों में अपनाकर अपनी खेती को अधिक लाभकारी और पर्यावरण अनुकूल बनाएंगे।

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