शिक्षा के प्रति समर्पण को नमन: प्रधान पाठक प्रदीप उइके को भावभीनी विदाई, संकुल परिवार ने सम्मान के साथ दी विदाई
साल्हेवारा से 5 किलोमीटर दूर ग्राम कोसमर्रा में आयोजित हुआ संकुल स्तरीय सम्मान समारोह, बाजे-गाजे के साथ निज निवास तक पहुँचाकर दी गई ससम्मान विदाई
साल्हेवारा। शिक्षा के क्षेत्र में वर्षों तक अपनी सेवाएँ समर्पित करने वाले सेवानिवृत्त प्रधान पाठक श्री प्रदीप उइके का विदाई एवं सम्मान समारोह 24 अक्टूबर 2026 को प्राथमिक शाला कोसमर्रा में भावुक, गरिमामय और आत्मीय वातावरण में आयोजित किया गया।
संकुल रामपुर परिवार के तत्वावधान में आयोजित इस समारोह में ग्राम पंचायत कोसमर्रा, ग्रामवासियों, विद्यार्थियों, शिक्षक-शिक्षिकाओं एवं सहकर्मियों ने उनकी शैक्षणिक सेवाओं, कर्तव्यनिष्ठा और समर्पण को याद करते हुए उनके प्रति सम्मान व्यक्त किया।
समारोह में संकुल प्राचार्य श्री पटेल ने अपने सारगर्भित उद्बोधन में श्री उइके के साथ बिताए कार्यकाल के अनुभवों को साझा किया। उन्होंने शिक्षा के प्रति उनकी लगन, कार्यशैली और समर्पित भाव की सराहना करते हुए कहा कि एक शिक्षक का योगदान केवल पाठ्यपुस्तकों तक सीमित नहीं होता, बल्कि वह विद्यार्थियों के व्यक्तित्व निर्माण और समाज के भविष्य को दिशा देने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
वहीं, संकुल समन्वयक श्री मनोज मरकाम ने श्री उइके के शिक्षा जगत से जुड़े जीवन, उनके त्याग, सेवाभाव और समर्पण का संक्षिप्त परिचय प्रस्तुत किया। उनके सेवाकाल को याद करते हुए उपस्थितजनों ने उनके योगदान के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की। समारोह के दौरान संकुल परिवार की ओर से श्री उइके को श्रीफल, शाल एवं स्मृति चिह्न भेंट कर सम्मानित किया गया। इस अवसर पर उनकी धर्मपत्नी की उपस्थिति ने कार्यक्रम को पारिवारिक आत्मीयता भी प्रदान की।
विदाई की बेला में भावुक हुआ माहौल
कार्यक्रम में संकुल के व्याख्याताओं, प्रधान पाठकों एवं शिक्षक साथियों के साथ ग्राम पंचायत के सरपंच, पंचगण, ग्रामवासी तथा श्री उइके से शिक्षा प्राप्त कर चुके विद्यार्थी भी उपस्थित रहे। आमगांव संकुल समन्वयक श्री खुशरो, श्री एम.एस. मरकाम एवं प्रधान पाठक श्री विनेश बांसरी सहित अन्य गणमान्यजनों की गरिमामयी उपस्थिति ने आयोजन की शोभा बढ़ाई।
समारोह का मंच संचालन संकुल समन्वयक श्री मनोज मरकाम ने किया। कार्यक्रम की समाप्ति के बाद ग्रामवासियों एवं शिक्षक साथियों ने बाजे-गाजे के साथ श्री प्रदीप उइके को उनके निज निवास तक ससम्मान पहुँचाया। यह आत्मीय विदाई उनके प्रति सहकर्मियों और ग्रामीण समुदाय के स्नेह, आदर तथा कृतज्ञता का प्रतीक बनी।
सेवा समाप्त होती है, लेकिन संस्कार और शिक्षा की विरासत बनी रहती है। श्री प्रदीप उइके का सम्मान समारोह इस बात का संदेश दे गया कि शिक्षा जगत में निष्ठा, समर्पण और सेवाभाव से अर्जित सम्मान जीवनभर साथ रहता है।।




















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