बिलाईगढ़ में ‘परिवारवाद‘ की पाठशाला: कोर्ट ने कहा लैब में भेजो, अफसर बोले – बहू तो प्राइमरी में ही पढ़ाएगी
बिलाईगढ़। जिले के शिक्षा विभाग में हाईकोर्ट के आदेश की खुलेआम अवहेलना का सनसनीखेज मामला सामने आया है। आरोप है कि कोर्ट के आदेश की आधी-अधूरी व्याख्या कर एक अयोग्य शिक्षिका को नियम विरुद्ध तरीके से फिर से सहायक शिक्षक बना दिया गया है। पूरा मामला रसूख और लेन-देन की ओर इशारा कर रहा है।
मामला WPS No. 7172/2025 कुमुदिनी साहू बनाम छत्तीसगढ़ शासन का है। इसमें जस्टिस पार्थ प्रतीम साहू ने 20 फरवरी 2026 को निर्णय दिया था।
क्या है पूरा मामला -
ग्राम सुतीरकुली निवासी कुमुदिनी साहू के पति सहायक शिक्षक थे, जिनका निधन 3 जुलाई 2023 को हो गया था। पत्नी ने B.Ed के आधार पर अनुकंपा नियुक्ति की मांग की। तत्कालीन DEO एस.एन. भगत ने 7 मार्च 2024 को उन्हें शासकीय प्राथमिक शाला सुतीउरकुली में सहायक शिक्षक पद पर नियुक्ति दे दी।
जबकि माननीय सुप्रीम कोर्ट और माननीय हाईकोर्ट छत्तीसगढ़ बिलासपुर का स्पष्ट आदेश है कि प्राथमिक शाला में सहायक शिक्षक के लिए हायर सेकेंडरी के साथ D.Ed/D.El.Ed और कक्षा 1 से 5 का TET अनिवार्य है, B.Ed मान्य नहीं है। शिकायत पर जांच के बाद DEO लक्ष्मी प्रसाद पटेल ने 9 जून 2025 को नियुक्ति निरस्त कर दी।
हाईकोर्ट ने क्या कहा था - दो हिस्सों में आदेश -
इसके बाद कुमुदिनी साहू ने हाईकोर्ट में याचिका लगाई। तर्क दिया कि सरकार ने इसी तरह के 2621 अन्य B.Ed शिक्षकों को 30 अप्रैल 2025 की नीति से सहायक शिक्षक विज्ञान (प्रयोगशाला सहायक) में समायोजित किया है। कोर्ट ने इसे भेदभाव मानते हुए दो निर्देश दिए -
कंडिका 7 - बर्खास्तगी आदेश निरस्त किया जाए।
कंडिका 8 - 8 सप्ताह के भीतर याचिकाकर्ता को भी सहायक शिक्षक विज्ञान (प्रयोगशाला सहायक) के पद पर नियुक्त किया जाए।
आरोप - कंडिका 8 दबाई, कंडिका 7 से गुपचुप जॉइनिंग
आरोप है कि तत्कालीन DEO (वर्तमान में निलंबित) जोईधाराम डहरिया ने हाई कोर्ट के आदेश का स्वेच्छाचारितापूर्ण ढंग से केवल कंडिका 7 का पालन किया और कंडिका 8 की पूरी तरह अवहेलना कर दी। कुमुदिनी साहू को 7 अगस्त 2026 को फिर से उसी शाला - शासकीय प्राथमिक शाला सुतीउरकुली में उसी अयोग्य पद सहायक शिक्षक पद पर गुपचुप तरीके से जॉइनिंग करा दी गई, जो पूरी तरह नियम विरुद्ध है। जबकि कोर्ट ने स्पष्ट कहा था कि नियुक्ति सहायक शिक्षक विज्ञान (प्रयोगशाला सहायक) में होनी है, प्राथमिक शाला में नहीं।
कलेक्टर से शिकायत, पर कोई कार्रवाई नहीं -
इस अनियमितता की शिकायत कलेक्टर पद्मिनी भोई साहू से 12 अगस्त 2026 को ऑनलाइन और 24 सितंबर 2026 को स्मरण पत्र देकर की गई, फिर भी कोई कार्रवाई नहीं होने पर 07 अक्टूबर 2026 को पुनः द्वितीय स्मरण पत्र आवेदन देकर समय-सीमा (T. L.)की बैठक में प्रकरण को रखे जाने का अनुरोध किया गया, किंतु अब तक कोई रुचि नहीं ली गई और न ही कोई कार्रवाई के निर्देश दिए गए।
मीडिया से भागते रहे अधिकारी, RTI में भी जानकारी नहीं -
जब मीडिया कर्मियों ने सुतीउरकुली संकुल के संकुल प्राचार्य रामकुमार साहू से जानकारी लेनी चाही, तो उन्होंने अपनी बहू का बचाव करते हुए कहा कि मेरी बहू विधवा है, उनके बच्चे हैं, यदि DPI एवं DEO ने हाईकोर्ट आदेश के विरुद्ध भी हितों को ध्यान में रखकर प्रयोगशाला सहायक के बजाय सहायक शिक्षक के रूप में नियुक्त किया है तो इसमें गलत नहीं है। उन्होंने पूरी जवाबदेही BEO एस.एन. साहू एवं DEO एल.एन. पटेल पर डाल दी। वहीं BEO एस.एन. साहू ने कहा कि हमने DEO के आदेश का पालन किया है, DEO से संपर्क करो। जब मीडिया कर्मी DEO कार्यालय में गए तो वहां 3 घंटे दरवाजे के सामने बैठाने के बाद DEO एल.एन. पटेल ने यह कहकर पल्ला झाड़ दिया कि 5 बजे के बाद आना, अभी मीटिंग में जाना है। जबकि चपरासी के माध्यम से 3 घंटे पहले ही सूचना दे दिया गया था।
रसूख का खेल -
बताया जा रहा है कि उक्त शिक्षिका जिला सारंगढ़-बिलाईगढ़ शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष रामकुमार साहू की बहू है, जिसके रसूख के आगे BEO और DEO नतमस्तक हैं। अधिकारियों का एक-दूसरे पर जवाबदेही मढ़ना और मीडिया से भागना कहीं न कहीं बड़े लेन-देन की ओर इशारा करता है। शायद विभाग द्वारा इसलिए ही RTI आवेदन में जॉइनिंग आदेश संबंधी जानकारी नहीं दी जा रही है कि कही पोल खुल न जाए।
सवाल यह है कि हाल ही में छात्राओं से अभद्रता के मामले में जिला शिक्षा विभाग द्वारा दो व्याख्याताओं पर निलंबन की कार्रवाई की गई है, परन्तु दो व्याख्याताओं पर तत्काल निलंबन की कार्रवाई करने वाला विभाग, हाईकोर्ट आदेश की अवहेलना और नियुक्ति में गड़बड़ी करने वालों के खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं कर रहा है? यह हाईकोर्ट के आदेश की अवमानना और पद के दुरुपयोग का सीधा मामला है।
कथन
संकुल प्राचार्य रामकुमार साहू :— उक्त शिक्षिका मेरी बहू है तथा विधवा है, उनके बच्चे हैं, यदि DPI एवं DEO ने हाईकोर्ट आदेश के विरुद्ध उनकी हितों को ध्यान में रखकर प्रयोगशाला सहायक के बजाय सहायक शिक्षक के रूप में नियुक्त किया है तो इसमें कोई गलत नहीं है।
BEO एस.एन. साहू :— नियुक्ति करता जिला शिक्षा अधिकारी है हम उनके आदेश का पालन किए है। उपरोक्त संबंध में डीईओ साहब ही बता पाएंगे।
DEO एल एन पटेल :— चपरासी के माध्यम से बोले कि 5 बजे के बाद आना, अभी मीटिंग में जाना है


















No comments:
Post a Comment
Please do not enter any spam link in the comment box.