लाल बहादुर शास्त्री जयंती-सादगी, ईमानदारी , कर्तव्यनिष्ठा और देश सेवा के लिए याद किए जाने वाले शास्त्री जी का जीवन प्रेरणा का स्त्रोत है।
सी एन आइ न्यूज पुरुषोत्तम जोशी। आप बेहतर दुनिया बनाने की उम्मीद तब तक नहीं कर सकते, जब तक आप व्यक्तियों में सुधार नहीं लाते।
इसके लिए हममें से प्रत्येक को अपने स्वयं के सुधार के लिए प्रयास करना चाहिए और साथ ही पूरी मानवता के प्रति अपनी सामूहिक जिम्मेदारी निभानी चाहिए। हमारा विशेष कर्तव्य उन लोगों की सहायता करना है, जिनके लिए हम स्वयं को सबसे अधिक उपयोगी समझते हैं।”
— लाल बहादुर शास्त्री, जन्म 2 अक्टूबर 1904
लाल बहादुर शास्त्री — जीवन, विचार और विरासत
पूरा नाम: लाल बहादुर शास्त्री
जन्म: 2 अक्टूबर 1904
जन्मस्थान: मुगलसराय, उत्तर प्रदेश
निधन: 11 जनवरी 1966
आयु: 61 वर्ष
राजनीतिक दल: भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस
भारत के दूसरे प्रधानमंत्री:9 जून 1964 – 11 जनवरी 1966
भारत रत्न: 1966 में मरणोपरांत
प्रारंभिक जीवन और स्वतंत्रता आंदोलन
साधारण पारिवारिक पृष्ठभूमि से आए।
कम उम्र में ही स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़ गए।
गांधी के असहयोग आंदोलन में भाग लिया।
स्वतंत्रता आंदोलन में भाग लेने के कारण ब्रिटिश शासन के दौरान कई बार जेल गए।
काशी विद्यापीठ से शिक्षा प्राप्त की और 1926 में उन्हें “शास्त्री” की उपाधि मिली।
राजनीतिक जीवन
स्वतंत्रता के बाद कांग्रेस संगठन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
परिवहन एवं संचार मंत्री रहे।
बाद में रेल मंत्री बने।
1956 के अरियालूर रेल हादसे के बाद नैतिक जिम्मेदारी स्वीकार करते हुए रेल मंत्री पद से इस्तीफा दिया।
बाद में गृह मंत्री बने।
जवाहरलाल नेहरू के निधन के बाद 1964 में भारत के दूसरे प्रधानमंत्री बने।
प्रधानमंत्री के रूप में
उनके कार्यकाल में भारत को कई गंभीर चुनौतियों का सामना करना पड़ा:
खाद्यान्न की कमी
आर्थिक दबाव
राष्ट्रीय सुरक्षा की चुनौतियाँ
1965 का भारत-पाकिस्तान युद्ध
“जय जवान, जय किसान”
लाल बहादुर शास्त्री ने प्रसिद्ध नारा दिया:
“जय जवान, जय किसान”
इसका संदेश था कि देश की सुरक्षा के लिए जवान और देश की खाद्य सुरक्षा के लिए किसान, दोनों महत्वपूर्ण हैं।
कृषि और खाद्य सुरक्षा
खाद्यान्न संकट के समय लोगों से स्वेच्छा से भोजन की खपत कम करने की अपील की।
कृषि उत्पादन बढ़ाने पर जोर दिया।
उनके कार्यकाल में कृषि क्षेत्र में ऐसे प्रयासों को समर्थन मिला, जिन्होंने आगे चलकर हरित क्रांति के विकास में योगदान दिया।
1965 का भारत- पाकिस्तान युद्ध
1965 में भारत-पाकिस्तान के बीच युद्ध हुआ।
शास्त्री ने युद्ध के दौरान देश को राजनीतिक नेतृत्व दिया।
सितंबर 1965 में युद्धविराम हुआ।
सोवियत मध्यस्थता के बाद 10 जनवरी 1966 को ताशकंद घोषणा पर हस्ताक्षर हुए।
FIAT कार और PNB LOAN की कहानी
शास्त्री अपने परिवार के लिए Fiat कार खरीदना चाहते थे।
उन्होंने कथित रूप से Punjab National Bank (PNB) से व्यक्तिगत ऋण लिया।
उन्होंने निजी खर्च के लिए सरकारी धन का उपयोग नहीं किया।
जनवरी 1966 में उनके निधन के समय ऋण पूरी तरह चुकाया नहीं गया था।
उनके परिवार ने बाद में ऋण की शेष राशि चुकाई।
यह प्रसंग अक्सर उनकी सादगी, ईमानदारी और निजी तथा सार्वजनिक धन के बीच स्पष्ट अंतर के उदाहरण के रूप में बताया जाता है।
व्यक्तिगत मूल्यों के लिए प्रसिद्ध
सादगी
ईमानदारी
अनुशासन
जिम्मेदारी
जनसेवा
राष्ट्र के प्रति समर्पण
जवान और किसान के प्रति सम्मान
राष्ट्र के प्रति निष्ठा पर उनका संदेश-
“देश के प्रति निष्ठा सभी अन्य निष्ठाओं से ऊपर होती है। यह पूर्ण निष्ठा है, क्योंकि इसे इस आधार पर नहीं तौला जा सकता कि हमें इसके बदले क्या प्राप्त होता है।



















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