हॉस्पिटल कम, जंगल ज्यादा : सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बिलाईगढ़ में स्वास्थ्य नहीं, बीमारी परोसी जा रही है
बिलाईगढ़। क्षेत्र के गरीब और लाचार मरीजों के लिए जीवनदायिनी कहे जाने वाले सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बिलाईगढ़ की हालत देखकर आप दंग रह जाएंगे। इलाज के लिए आने वाला मरीज यहां एक बीमारी से नहीं, बल्कि दोहरी बीमारी के डर से सहमा हुआ है।
अस्पताल की चारों दीवारों पर झाड़ियों का ऐसा अंबार लगा है कि खिड़की से झांकती झाड़ियां भर्ती मरीजों को डरा रही हैं। मानो ऐसा लग रहा है कि यह हॉस्पिटल कम और फॉरेस्ट ज्यादा है।
खिड़की से झांक रही मौत -
अस्पताल के अंदर भर्ती मरीज सांप, बिच्छू, जहरीले कीड़े और मच्छरों के प्रकोप से दहशत में हैं। झाड़ियों में पनप रहे जहरीले जीव-जंतुओं के वार्ड में घुसने का खतरा हर पल बना हुआ है। मजबूरी यह है कि मरीज विरोध भी नहीं कर सकते, क्योंकि उन्हें डर है कि शिकायत करने पर उनका इलाज ही न बिगाड़ दिया जाए या लापरवाही न बरती जाए।
जहां देखो वहां झाड़ी ही झाड़ी, कचरे का ढेर -
अस्पताल प्रबंधन की लापरवाही का आलम यह है कि पूरे परिसर की स्थिति नारकीय बनी हुई है।
- औषधि भंडार कक्ष के पीछे - घनी झाड़ी
- टीका भंडार के पीछे - घनी झाड़ी
- कार्यालय के पीछे - घनी झाड़ी
- विकिरण क्षेत्र (एक्स-रे) के पीछे - घनी झाड़
- मरीजों को एडमिट किए गए वार्डों के चारों तरफ– झाड़ी ही झाड़ी
- मरीजों के लिए खाना बनाने वाले किचन रूम के पीछे - घनी झाड़ी
- फार्मेसी (दवा काउंटर), पंजीयन कक्ष और सभी डॉक्टरों के ऑफिस के बगल में - झाड़ी ही झाड़ी
इतना ही नहीं, अस्पताल में उपयोग की गई खाली बोतल, शीशी, इंजेक्शन और दवाइयों की अन्य अनुपयोगी जहरीली सामग्री अस्पताल के पीछे खुले में फेंकी पड़ी है, मरीजों को दी गई खाने के बचे हुए खाना और डिस्पोजल दोना पत्तल वार्डो के पीछे पड़ी नजर आया जो गंभीर संक्रमण और बीमारी का बड़ा खतरा बनी हुई है। बीमारी से बचने के लिए अस्पताल की शरण में आने वाला मरीज यहां दोहरी बीमारी के भय से भयभीत हो रहा है। मरीजों व उनके साथ आए हुए परिजनों को पीने के लिए पानी की किल्लतों का भी सामना करना पड़ रहा है 2–4 जगहों पर नल लगा हुआ है पर पीने योग्य नहीं है। पीने योग्य पानी के लिए किचन के पास लगे मात्र 1 नल ही है जहां बीमार मरीज अपने वार्ड से निकलकर जाने की लिए मजबूर है। अस्पताल में स्थिति यह है कि महिला आया मरीजों का इलाज करते नजर आती है। मरीजों को दिए जाने वाले खाने की गुणवत्ता भी निम्न स्तर की है। पूरा अस्पताल प्रबंधन वार्ड बॉय, नर्स और आया के भरोसे चल रहा है। डॉक्टर द्वारा लिखी गई दवाइयों में से आधी दवाइयां मरीजों को बाहर के मेडिकल स्टोर से लेने की सलाह दी जाती है।
सवालों के घेरे में प्रबंधन -
सुरक्षा की दृष्टि से अस्पताल प्रबंधन पूरी तरह से फेल है। आखिर गरीब मरीज जाएं तो जाएं कहां? शासन की लाखों रुपये की योजनाएं और स्वास्थ्य सुविधाएं केवल कागजों पर सिमट कर रह गई हैं। क्षेत्र की जनता ने जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग के उच्च अधिकारियों से मांग की है कि सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बिलाईगढ़ का औचक निरीक्षण कर दोषी अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई की जाए और अस्पताल परिसर को तत्काल साफ-सुथरा कर मरीजों को सुरक्षित इलाज उपलब्ध कराया जाए।





















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