आज है शरद पूर्णिमा , मान्यता है कि देवी महालक्ष्मी इस रात्रि पृथ्वी पर विचरण करती हैं और देखती है कि कौन जाग रहा है
(कोजागरी का अर्थ, कौन जाग रहा है ) रायपुर- भारतीय पंचांग के अनुसार आश्विन मास की पूर्णिमा को शरद पूर्णिमा, कोजागरी पूर्णिमा, कौमुदी व्रत, कुमार उत्सव, कमला पूर्णिमा अथवा रास पूर्णिमा कहा जाता है।
इसी तिथि को भगवान श्रीकृष्ण द्वारा महारास रचाए जाने की मान्यता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, इसी पूर्णिमा को समुद्र-मंथन से देवी लक्ष्मी का प्राकट्य हुआ था।
ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार इस रात्रि चन्द्रमा षोडश कलाओं से परिपूर्ण होकर अमृतमयी किरणें बिखेरते है। उसकी किरणों से अमृत बरसता है।इसी कारण पूरे भारत वर्ष में इस दिन खीर बनाकर रात्रि में चन्द्रप्रकाश में रखने तथा प्रातःकाल उसे प्रसाद रूप में ग्रहण करने की परम्परा है।"। इस पावन अवसर पर राजधानी रायपुर में शरद पूर्णिमा पर्व मनाने की तैयारियां पूरी हो चुकी है।




















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