विजयादशमी (दशहरा) आज
यह पर्व अधर्म पर धर्म और बुराई पर अच्छाई की जीत का पर्व है। सी एन आइ न्यूज पुरुषोत्तम जोशी।
आज पूरे भारतवर्ष में विजयादशमी पर्व की धूम है,दशहरा (जिसे विजयदशमी भी कहा जाता है) बुराई पर अच्छाई और अधर्म पर धर्म की विजय का एक प्रमुख हिंदू त्योहार है। जो हमें अधर्म पर धर्म की जीत का संदेश देती हैं।
• 'दशहरा' शब्द संस्कृत के 'दशहरा' (दश + हरा) से बना है, जिसका अर्थ है—दस सिरों वाले रावण का वध या हार।
* इसे 'विजयदशमी' भी कहते हैं, जिसका अर्थ है—दसवें दिन मिलने वाली विजय।
• यह त्योहार हर साल अश्विन मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को मनाया जाता है।
• अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार यह आमतौर पर सितंबर या अक्टूबर के महीने में आता है।
• यह शरद नवरात्रि के नौ दिनों के समापन के ठीक बाद दसवें दिन आता है।
रावण वध की कथा (रामायण)
पौराणिक कथा के अनुसार, त्रेतायुग में लंका का राजा रावण बहुत बड़ा विद्वान और शिवभक्त था, लेकिन अहंकार के कारण वह अत्यंत क्रूर और अधर्मी हो गया था। जब भगवान श्रीराम, माता सीता और लक्ष्मण जी के साथ 14 वर्ष के वनवास पर थे, तब रावण ने छल से माता सीता का हरण कर लिया।
• वानर सेना की मदद: भगवान राम ने माता सीता की खोज शुरू की। रास्ते में उनकी मुलाकात हनुमान जी, सुग्रीव और उनकी वानर सेना से हुई। सभी ने मिलकर समुद्र पर रामसेतु का निर्माण किया और लंका पर चढ़ाई की।
• भीषण युद्ध और रावण का अंत: लंका में भगवान राम की सेना और राक्षसों के बीच कई दिनों तक भयंकर युद्ध चला। इस युद्ध में रावण के भाई कुंभकर्ण और पुत्र मेघनाद सहित कई पराक्रमी राक्षस मारे गए।
• अधर्म पर धर्म की विजय: अंत में, अश्विन मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को भगवान श्रीराम ने रावण की नाभि पर तीर मारकर उसका वध किया और माता सीता को मुक्त कराया। रावण के वध के साथ ही संसार को उसके अत्याचारों से मुक्ति मिली। इसी खुशी में हर साल दशहरा मनाया जाता है।
महिषासुर वध की कथा-
एक अन्य प्रमुख पौराणिक कथा के अनुसार, प्राचीन काल में महिषासुर नाम का एक अत्यंत शक्तिशाली राक्षस था। उसने कड़े तप से ब्रह्मा जी को प्रसन्न कर वरदान मांग लिया था कि कोई भी देवता या पुरुष उसका वध न कर सके। इस वरदान के अहंकार में आकर उसने तीनों लोकों पर आतंक मचा दिया और देवताओं को स्वर्ग से निकाल दिया।
• मां दुर्गा की उत्पत्ति: महिषासुर के अत्याचारों से परेशान होकर ब्रह्मा, विष्णु और महेश (शिव) सहित सभी देवताओं ने अपने तेज और शक्तियों को मिलाकर मां दुर्गा को प्रकट किया। देवताओं ने देवी को अपने दिव्य अस्त्र-शस्त्र भी सौंपे।
• नौ दिनों का युद्ध: मां दुर्गा और महिषासुर की सेना के बीच नौ दिनों तक भीषण युद्ध चला। महिषासुर ने कई रूप बदलकर देवी को चकमा देने की कोशिश की।
• महिषासुर का संहार: अंत में, दसवें दिन (विजयदशमी) मां दुर्गा ने महिषासुर का वध कर दिया। देवी की इस महान विजय के कारण ही इस दिन को 'विजयदशमी' कहा गया और देवताओं ने फिर से स्वर्ग पर अपना अधिकार प्राप्त किया।
दशहरा का महत्व-
• सत्य की जीत: यह पर्व हमें संदेश देता है कि बुराई चाहे कितनी भी शक्तिशाली क्यों न हो, अंत में जीत हमेशा सत्य और धर्म की ही होती है।
• आंतरिक बुराइयों का अंत: यह हमें अपने भीतर के दस प्रकार के दुर्गुणों (काम, क्रोध, लोभ, मोह, मद, अहंकार, आलस, हिंसा, चोरी और नफरत) को त्यागने की प्रेरणा देता है।
• शस्त्र पूजन: इस दिन शक्ति और शौर्य के प्रतीक के रूप में शस्त्रों की पूजा (आयुध पूजा) भी की जाती है।
सांस्कृतिक एकता: जगह-जगह रामलीला का मंचन और रावण, मेघनाद व कुंभकरण के पुतलों का दहन कर समाज में उल्लास और एकता का संदेश दिया जाता है।




















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