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Sunday, November 1, 2026

समय को व्यर्थ नहीं, श्रेष्ठ कर्मों में लगाएं – संतोषी दीदी

बिलासपुर छत्तीसगढ़।


समय को व्यर्थ नहीं, श्रेष्ठ कर्मों में लगाएं – संतोषी दीदी





01 नवम्बर 2026, बिलासपुर। प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय, बिलासपुर की मुख्य शाखा टेलीफोन एक्सचेंज रोड स्थित राजयोग भवन द्वारा केंद्रीय जेल बिलासपुर में बंदियों के आत्मिक उत्थान एवं सकारात्मक जीवन परिवर्तन के उद्देश्य से आयोजित कार्यक्रम में राजयोग भवन की वरिष्ठ राजयोग शिक्षिका ने बंदियों को समय के महत्व, आत्मचिंतन, सकारात्मक सोच एवं जीवन में नई शुरुआत करने की प्रेरणा दी।




अपने उद्बोधन में वरिष्ठ राजयोग शिक्षिका ने कहा कि समय संसार की सबसे मूल्यवान संपत्ति है। धन खो जाने पर दोबारा कमाया जा सकता है, स्वास्थ्य बिगड़ने पर उपचार से सुधारा जा सकता है, लेकिन एक बार बीता हुआ समय कभी वापस नहीं आता। इसलिए जीवन के प्रत्येक क्षण का सदुपयोग करना ही सच्ची समझदारी है। परिस्थितियां चाहे कैसी भी हों, हर व्यक्ति के पास वर्तमान समय को बेहतर बनाने का अवसर हमेशा रहता है।

उन्होंने कहा कि जीवन में कभी-कभी मनुष्य से ऐसी गलतियां हो जाती हैं, जिनका परिणाम उसे लंबे समय तक भुगतना पड़ता है। लेकिन इसका अर्थ यह नहीं कि उसका पूरा जीवन ही गलतियों से परिभाषित हो जाए। बीता हुआ कल हमारी सीख है, वर्तमान हमारा अवसर है और आने वाला कल हमारे संकल्पों से बनता है। इसलिए पुरानी बातों को लेकर पश्चाताप में डूबे रहने के बजाय उनसे सीख लेकर अपने वर्तमान को श्रेष्ठ बनाने का प्रयास करना चाहिए।

उन्होंने बंदियों को विशेष रूप से प्रेरित करते हुए कहा कि यह समय स्वयं को जानने, अपनी कमियों को पहचानने, बुरी आदतों को छोड़ने और जीवन में अच्छे संस्कार धारण करने का अवसर बन सकता है। यदि व्यक्ति प्रतिदिन अपने विचारों को सकारात्मक बनाने का अभ्यास करे तो धीरे-धीरे उसके व्यवहार और व्यक्तित्व में भी परिवर्तन आने लगता है।

बीके संतोषी दीदी ने राजयोग मेडिटेशन का महत्व बताते हुए कहा कि कुछ समय अपने मन को शांत रखने, परमात्मा का स्मरण करने और स्वयं को एक शांत, पवित्र एवं शक्तिशाली आत्मा अनुभव करने से मानसिक तनाव, पश्चाताप, क्रोध और नकारात्मक विचारों को कम करने में सहायता मिलती है। इसके लिए प्रतिदिन कुछ समय आत्मचिंतन और ध्यान के अभ्यास को देना चाहिए।

कार्यक्रम के दौरान उन्होंने बंदियों को एक सुंदर संकल्प भी कराया कि वे अपने जीवन के शेष समय को व्यर्थ नहीं गंवाएंगे, प्रतिदिन कोई न कोई अच्छी बात सीखेंगे, अपने व्यवहार में सुधार लाएंगे तथा परिवार और समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को समझते हुए एक आदर्श जीवन जीने का प्रयास करेंगे।

उन्होंने कहा कि मनुष्य का वास्तविक परिवर्तन तब शुरू होता है, जब वह दूसरों को बदलने के बजाय स्वयं को बदलने का संकल्प लेता है। हर सुबह एक नई उम्मीद लेकर आती है और हर नया दिन स्वयं को बेहतर बनाने का एक नया अवसर प्रदान करता है।

अंत में सभी बंदियों को यह प्रेरणा दी गई कि अपने जीवन की कहानी को एक नई दिशा दें, क्योंकि अतीत चाहे जैसा भी रहा हो, भविष्य को सुंदर बनाने का अधिकार आज भी हमारे हाथों में है। समय को केवल बिताएं नहीं, बल्कि ऐसा बनाएं कि आने वाला हर दिन आपके जीवन में एक नई आशा, नई शक्ति और नई पहचान लेकर आए।

ईश्वरीय सेवा में,

बीके स्वाति

राजयोग भवन, बिलासपुर

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