बालोद छत्तीसगढ़।
ग्राम राहुद तालाब का ऐतिहासिक फैसला एस डी एम टंकेश्वर प्रसाद साहू के द्वारा फैसला पुर्व जिला पंचायत सदस्य दिनेश कुमार साहू की खुली पोल निकला भू माफिया
राहुद नया तालाब का मामला जो लंबे समय से न्यायालीन प्रक्रिया में चल रहा था आखिरकार उनका फैसला 27/10/2026 को अनुभागी अधिकारी टंकेश्वर प्रसाद साहू के द्वारा दिया गया ।
प्रकरण जिसके अनुसार तहसीलदार राहुल गुप्ता द्वारा शासकीय तालाब को तुलसी राम पिता प्रेमलाल साहू , व दिनेश कुमार साहू पिता नेतराम साहू के पर नामांतरण करने आदेश जारी कर उनके नाम पर कर दिया गया गया था जिनकी जानकारी ग्राम वासियों को दिनेश कुमार द्वारा तालाब में मछली मरवाने के बाद हुई उपरांत ग्राम वासियों द्वारा एस डी एम कोर्ट में याचिका दायर किया गया और याचिका स्वीकार किया गया परन्तु दिनेश कुमार द्वारा अपने वकील के माध्यम से धारा 5 (विलंब से याचिका दायर करना) के माध्यम से अपर कलेक्टर के पास याचिका दायर कर और ग्राम पंचायत राहुद के सरपंच कुलेश्वरी साहू ने दिनेश साहू को अपने गोत्रज परिवार व चुनाव में अपने पक्ष के मुख्य सहयोग कर्ता होने के कारण तालाब के माध्यम से आर्थिक लाभ दिलाने के उद्देश्य से और न्यायालय की फैसला को प्रभावित करने के उद्देश्य सरपंच चुनाव मे दिए गए साथ का हक अदा करने के उद्देश्य से अपने पद का दुरूपयोग करते हुऐ ग्राम पंचायत प्रस्ताव कापी में प्रस्ताव पारित किया गया की उक्त तालाब को दिनेश साहू के नाम पर होने से कोई आपत्ति नहीं है , और एस डी एम के द्वारा स्वीकार्य याचिका को अपर कलेक्टर के द्वारा गलत बताया गया , उसके उपरान्त ग्राम वासियों द्वारा कमिश्नर कोर्ट में अपर कलेक्टर के फैसले के खिलाफ याचिका दायर किया गया जहा ग्राम वासियों को न्याय मिलता है और तहसीलदार और अपर कलेक्टर के फैसले को गलत बताते हुए अनुभागिय अधिकारी को पुन सुनवाई कर तीन माह के भीतर फैसला सुनाने का आदेश किया जाता है परंतु यहां पर भी दिनेश कुमार का रसूख दिखता है और कमिश्नर के आदेश को ताक में रखकर कर उच्च न्यायालय की अवहेलना का प्रयास किया गया और पुनः अपर कलेक्टर पास पुनरीक्षण याचिका दायर किया गया और एस डी एम कोर्ट को अपना सुनवाई रोकना पड़ा परन्तु ग्राम वासियों द्वारा सत्य की लड़ाई को जारी रखा गया और अपर कलेक्टर के खिलाफ जनदर्शन और cm हेल्फ लाइन में शिकायत दर्ज कराई गई तब जाकर अपर कलेक्टर कोसिक के द्वारा याचिका खारिज किया गया और पुनः एस डी एम कोर्ट को सुनवाई का आदेश किया गया इसके बाद अपर कलेक्टर का ट्रांसफर हो जाता है और उसके बाद अपर कलेक्टर के बाबू पिस्दा का खेल शुरू होता है और उनके द्वारा भू माफिया की सच्चाई को दबाने के लिऐ 22/09/2026 को ऑन लाइन खारिज की गई याचिका की फाइल को दबाकर रखा जाता है और ग्राम वासियों को 6/10/2026 पेशी की फर्जी तारीख दे दी जाती है जहा जाने पर ग्राम वासियों को पता चलता है कि याचिका 22/9/2026 को खारिज कर एस डी एम कोर्ट को भेजा जा चुका है पर ग्राम वासियों द्वारा एस डी एम को मे पता किया जाता है तो पता चलता है फाइल 10/10/2026 तक नहीं पहुंचा है , उसके उपरान्त ग्राम वासियों द्वारा अपर कलेक्टर के बाबू का सी एम हेल्प लाइन पर शिकायत दर्ज कराई गई तब जाकर फाइल को एस डी एम कोर्ट भेजा गया गया जहां पर अनुभागी अधिकारी टांकेश्वर प्रसाद साहू ने मामले की गंभीरता को समझते हुए याचिका को गंभीरता से अध्ययन कर उच्च न्यायालय के आदेश का सम्मान रखते हुए 28/10/2026 को कमिश्नर कोर्ट के 3 महीने के मियाद पूरी होने के पूर्व लगातार सुनवाई कर 27 10.2026 को आदेश जारी कर दिया गया जिसमें उक्त तालाब को पूर्व से ही शासकीय निस्तारी तालाब बताया गया और तहसीलदार के द्वारा दिए गए फैसले को गलत बताया गया जिसका प्रकरण 2019 में एस डी एम कोर्ट में चल चुका था जिसमें उक्त तालाब को शासकीय निस्तारी तालाब होने का फैसला सुनाया जा चुका था जिसे दिनेश कुमार द्वारा तहसील न्यायालय से छुपाया गया ।
तहसील न्यायालय में झूठा इस्तीहार, झूठा मुनादी का तथा झूठा दस्तावेज प्रस्तुत कर व अपने आप को नारायण का झूठा वारिस बता कर अपने नाम दर्ज करवा लिया था जिसे ग्राम वासियों की लंबी लड़ाई के बाद अधिवक्ता सुलेखा सोनी द्वारा ग्राम वासियों का पक्ष रखा गया और दिनेश साहू की ओर से कृष्णमूर्ति तिवारी के द्वारा पक्ष रखा गया जिसमें कृष्णमूर्ति तिवारी और उनके पक्ष को करारी हार मिली और ग्राम वासियों की जीत हुई और तहसील न्यायालय के आदेश को खारिज करते हुए तालाब को नीस्तारी शासकीय दर्ज करने का आदेश जारी किया गया अब देखना ये है की फर्जी दस्तावेज प्रस्तुत करने वाले भू माफिया दिनेश साहू, सरकारी दस्तावेज का उपयोग कर परिवार को लाभ दिलाने की कोशिश करने वाली सरपंच कुलेश्वरी साहू, फाइल दबाने वालेअपर क्लेक्टर के बाबू पिस्दा, और सरकारी सम्पति की रक्षा को ताक मे रख कर धारा 5 को सही बताने वाले अपर कलेक्टर कोसिक दस्तावेज की जांच किए बगैर नाम चढ़ाने वाले तहसीलदार के ऊपर प्रशासन द्वारा किस प्रकार की कार्य वाही की जाती है



















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