करवाचौथ 2026:
मां पार्वती को क्यों कहा गया अपर्णा? करवा चौथ के निर्जला व्रत में छिपा है रहस्य।
सी एन आइ न्यूज़ पुरुषोत्तम जोशी।
करवा चौथ-2026. हिंदू धर्म में करवा चौथ का व्रत पति की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और वैवाहिक जीवन में सुख-समृद्धि की कामना से जुड़ा है. इस दिन सुहागिन महिलाएं सूर्योदय से लेकर चंद्रोदय तक निर्जला व्रत रखती हैं। कल रखेंगी सुहागिनें करवा चौथ का व्रत, और भगवान शिव, माता पार्वती, भगवान गणेश तथा करवा माता की पूजा कर आशीर्वाद प्राप्त करेंगी।
करवा चौथ पर माता पार्वती की पूजा का विशेष महत्व माना जाता है. धार्मिक मान्यताओं में उन्हें अखंड सौभाग्य, प्रेम, समर्पण और वैवाहिक सुख का प्रतीक माना गया है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि माता पार्वती का एक नाम अपर्णा भी है, जिसके पीछे त्याग और कठिन तपस्या की एक रोचक पौराणिक कथा जुड़ी हुई है?
माता पार्वती को अपर्णा क्यों कहा गया?
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, माता पार्वती ने भगवान शिव को अपने पति के रूप में पाने के लिए कठिन तपस्या की थी. उनके मन में भगवान शिव के प्रति अटूट श्रद्धा और समर्पण था. अपने संकल्प को पूरा करने के लिए उन्होंने सुख-सुविधाओं का त्याग कर एकांत में साधना की. कथा के अनुसार, शुरुआत में माता पार्वती कंद-मूल और फल खाकर तपस्या करती थीं. समय बीतने के साथ उन्होंने भोजन की मात्रा कम कर दी और फिर केवल पेड़ों से अपने आप गिरने वाले सूखे पत्तों पर निर्भर रहने लगीं. उनकी तपस्या लगातार कठोर होती गई.।
मान्यता है कि एक समय ऐसा भी आया, जब माता पार्वती ने सूखे पत्तों को खाना भी पूरी तरह छोड़ दिया. संस्कृत में पत्ते को पर्ण कहा जाता है. माता पार्वती ने जब पर्ण यानी पत्तों का भी त्याग कर दिया, तो उन्हें अपर्णा नाम से जाना जाने लगा. इस नाम का धार्मिक अर्थ उनके असाधारण संकल्प, धैर्य और तपस्या से जोड़ा जाता है. माता पार्वती की यह कथा बताती है कि भारतीय धार्मिक परंपराओं में उन्हें केवल शक्ति और सौंदर्य की देवी के रूप में ही नहीं, बल्कि दृढ़ इच्छाशक्ति और समर्पण के प्रतीक के रूप में भी देखा जाता है.
करवा चौथ के निर्जला व्रत से क्या है माता पार्वती की तपस्या का संबंध?
करवा चौथ पर सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र और सुखी दांपत्य जीवन की कामना से निर्जला व्रत रखती हैं. इस दौरान वे अन्न और जल का सेवन नहीं करतीं और चंद्रमा के दर्शन के बाद पूजा करके व्रत खोलती हैं. वहीं, माता पार्वती की तपस्या की कथा भगवान शिव को पति के रूप में पाने के लिए उनके दृढ़ संकल्प और त्याग को दर्शाती है. इसी कारण करवा चौथ पर माता पार्वती की पूजा को विशेष महत्व दिया जाता है. महिलाएं उनसे वैवाहिक जीवन में सुख, प्रेम, विश्वास और सौभाग्य बनाए रखने की कामना करती हैं.
करवा चौथ 2026 पर कब होगी पूजा पंचांग के अनुसार, साल 2026 में करवा चौथ का व्रत 29 अक्टूबर, गुरुवार को रखा जाएगा. इस दिन सुहागिन महिलाएं सुबह से निर्जला व्रत रखेंगी और शाम के समय परंपरा के अनुसार करवा चौथ की पूजा करेंगी. इसके बाद रात में चंद्रमा के दर्शन करके अर्घ्य दिया जाता है और पति के हाथों जल ग्रहण कर व्रत खोला जाता है


















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