कोजागर व्रत आज-शरद पूर्णिमा की रात को देवी लक्ष्मी और चंद्रमा की पूजा की जाती है
सी एन आइ न्यूज़ पुरुषोत्तम जोशी।
कोजागर व्रत पूर्णिमा आश्विन मास की पूर्णिमा को मनाया जाता है, जिसे शरद पूर्णिमा भी कहते हैं। वर्ष 2026 में कोजागर व्रत/कोजागरी पूजा रविवार, 25 अक्टूबर 2026 को है।
कोजागर व्रत क्या है?
आश्विन पूर्णिमा की रात को देवी लक्ष्मी और चंद्रमा की पूजा की जाती है।
जागने की परंपरा: इस रात जो लोग जागकर देवी लक्ष्मी की आराधना करते हैं, उन्हें 'कोजागर' (यानी 'कौन जाग रहा है?') कहा जाता है।
अन्य नाम: इसे कौमुदी व्रत, रास पूर्णिमा और बंगाली लक्ष्मी पूजा भी कहते हैं।
वर्ष 2026 में यह व्रत 25 अक्टूबर 2026 (रविवार) को है।
शुभ मुहूर्त (निशिता काल): रात 11:39 बजे से 12:30 बजे तक मुख्य पूजन का समय रहेगा।
कोजागर व्रत कथा (दो बहनों की प्रचलित पौराणिक कथा)
एक समय की बात है, एक साहूकार के दो बेटियाँ थीं। दोनों बहनें आश्विन मास की पूर्णिमा (शरद पूर्णिमा) को महालक्ष्मी का व्रत रखती थीं। बड़ी बेटी विधि-विधान और पूर्ण निष्ठा के साथ पूरा व्रत करती थी, जबकि छोटी बेटी व्रत को अधूरा रखती थी या नियमों का ठीक से पालन नहीं करती थी। छोटी बहन का दुःख: व्रत अधूरा रखने के कारण छोटी बहन के जो भी संतान होती, वह पैदा होते ही मर जाती थी। बड़ी बहन का पुण्य: बड़ी बहन के पूर्ण व्रत के प्रभाव से उसका घर-परिवार हमेशा धन-धान्य और सुखी जीवन से भरा रहता था एक दिन जब छोटी बहन अपने मृत बच्चे को लेकर बहुत दुखी थी, तब उसके घर बड़ी बहन पहुँची। बड़ी बहन जैसे ही बैठने लगी, उसके स्पर्श से मरा हुआ बालक जीवित हो उठा और रोने लगा। यह देखकर छोटी बहन हैरान रह गई और बोली, "हे बहन! यदि तुम्हारे यहाँ ऐसा होता, तो मेरे इस पाप और हत्या का दोष तुम पर आ जाता।" तब बड़ी बहन ने मुस्कुराते हुए कहा, "यह सब मेरे द्वारा किए गए शरद पूर्णिमा (कोजागर) के पूर्ण व्रत का प्रताप है। तुम्हारे अधूरे व्रतों के कारण तुम्हारे बच्चे जीवित नहीं रहते। यदि तुम भी सच्चे मन से यह व्रत विधि-विधान पूर्वक करोगी, तो तुम्हारे भी सारे कष्ट दूर हो जाएंगे।"
कोजागर व्रत का महत्व
माता लक्ष्मी का विचरण: मान्यता है कि इस रात मां लक्ष्मी पृथ्वी पर भ्रमण करती हैं और देखती हैं कि कौन जाग रहा है। जो जागता मिलता है, उसे वे धन-धान्य से संपन्न कर देती हैं।
अमृत वर्षा: इस दिन चंद्रमा अपनी सोलह कलाओं से परिपूर्ण होता है और रात को चांदनी में रखी खीर में औषधीय व अमृत रूपी गुण समा जाते हैं।
आरोग्य और सुख: चांदनी रात में रखी खीर का प्रसाद खाने से स्वास्थ्य उत्तम रहता है और जीवन में सुख-समृद्धि आती है।


















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