दीपावली पर समाजसेवा की अनूठी मिसाल — वरिष्ठ समाजसेवी श्री मातादीन अग्रवाल ने जरूरतमंद परिवारों को भेंट किए कंबल
श्री अग्रसेन सांझा चूल्हा के हितग्राहियों सहित अपना घर आश्रम गोढ़ी, रायपुर एवं रायगढ़ में भी पहुँची सेवा की गर्माहट
सी एन आइ न्यूज़ पुरुषोत्तम जोशी।
रायपुर- छत्तीसगढ़ प्रांतीय अग्रवाल संगठन द्वारा संचालित महत्वाकांक्षी सेवा प्रकल्प ‘श्री अग्रसेन सांझा चूल्हा’ के अंतर्गत दीपावली के पावन अवसर पर जरूरतमंद परिवारों को कंबल प्रदान कर मानव सेवा की अनुकरणीय मिसाल प्रस्तुत की गई।
संगठन के वरिष्ठ समाजसेवी एवं प्रमुख मार्गदर्शक श्री मातादीन अग्रवाल ने अपनी उदारता एवं संवेदनशीलता का परिचय देते हुए श्री अग्रसेन सांझा चूल्हा योजना के समस्त हितग्राही परिवारों को उत्कृष्ट गुणवत्ता वाले कंबल भेंट किए।
इसके अतिरिक्त उन्होंने अपना घर आश्रम, गोढ़ी, रायपुर में भी कंबल प्रदान किए तथा अपना घर आश्रम, रायगढ़ में जरूरतमंदों के लिए कंबल भिजवाने की व्यवस्था की है।
उल्लेखनीय है कि छत्तीसगढ़ प्रांतीय अग्रवाल संगठन द्वारा संचालित श्री अग्रसेन सांझा चूल्हा योजना के अंतर्गत जरूरतमंद परिवारों को दैनिक उपयोग की राशन सामग्री निर्धारित सहयोग राशि पर उपलब्ध कराई जाती है। इस योजना का उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को सम्मानपूर्वक सहायता प्रदान करना तथा समाज में सहयोग, संवेदना एवं आत्मीयता की भावना को सुदृढ़ करना है।
इस अवसर पर संगठन के प्रांतीय अध्यक्ष डॉ. अशोक अग्रवाल ने श्री मातादीन अग्रवाल के सेवाभावी योगदान की सराहना करते हुए कहा
“दीपावली का वास्तविक आनंद केवल अपने घरों में दीप जलाने से नहीं, बल्कि किसी जरूरतमंद के जीवन में आशा और खुशियों का प्रकाश फैलाने से मिलता है। श्री मातादीन जी अग्रवाल ने कंबल प्रदान कर केवल ठंड से बचाव का साधन नहीं दिया, बल्कि जरूरतमंदों को समाज के स्नेह, सम्मान और अपनत्व की गर्माहट भी प्रदान की है।”
डॉ. अग्रवाल ने कहा कि भगवान श्री अग्रसेन जी के एक ईंट–एक रुपया के सिद्धांत से प्रेरित होकर संगठन निरंतर सेवा कार्यों का विस्तार कर रहा है। समाज के समर्थ एवं संवेदनशील परिवारों का सहयोग ही इस अभियान की वास्तविक शक्ति है।
छत्तीसगढ़ प्रांतीय अग्रवाल संगठन परिवार ने श्री मातादीन अग्रवाल का हार्दिक अभिनंदन करते हुए उनके स्वस्थ, सुखी एवं दीर्घायु जीवन की मंगलकामना की।
संगठन ने समाज के सभी सक्षम एवं सेवाभावी नागरिकों से आह्वान किया कि वे इस पुण्य अभियान से जुड़कर जरूरतमंद परिवारों के जीवन में खुशियाँ लाने के सहभागी बनें।
“ सेवा ही सबसे बड़ा धर्म है और मानवता ही सबसे बड़ी पूजा। ”



















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