आज है काली चौदस ,रूप चौदस , और छोटी दीवाली
सी एन आइ न्यूज़ पुरुषोत्तम जोशी।
काली चौदस को छोटी दिवाली, नरक चतुर्दशी, रूप चौदस या भूत चतुर्दशी के नाम से भी जाना जाता है। यह पर्व दिवाली से एक दिन पहले आज कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मनाया जा रहा है। इस दिन विशेष रूप से महाकाली, भगवान कृष्ण और यमराज की पूजा का विधान है।
काली चौदस (रात्रि पूजा): शनिवार, 07 नवंबर 2026
चतुर्दशी तिथि प्रारंभ: 07 नवंबर 2026, सुबह 10:49 से
चतुर्दशी तिथि समाप्त: 08 नवंबर 2026, सुबह 11:29 तक
काली पूजा का शुभ मुहूर्त: 07 नवंबर को रात 11:41 से 08 नवंबर को रात 12:33 तक*।
नकारात्मक ऊर्जा का नाश: आज का दिन आलस्य, भय और बुरी शक्तियों को दूर करने का प्रतीक है।
रक्षा और आरोग्य: इस दिन महाकाली और हनुमान जी की पूजा से अकाल मृत्यु, शनि/राहु के बुरे प्रभावों तथा रोगों से मुक्ति मिलती है।
यम दीपदान: यमराज के निमित्त दीपक जलाने से नरक यातनाओं और अकाल मृत्यु का भय समाप्त होता है।
कथा (पौराणिक प्रसंग):
नरकासुर वध: पौराणिक कथा के अनुसार, भगवान श्रीकृष्ण, उनकी पत्नी सत्यभामा और इंद्र ने इसी चतुर्दशी तिथि को प्राग्ज्योतिषपुर के अत्याचारी असुर नरकासुर का वध किया था। उसने 16,000 राजकुमारीयों को बंधक बना रखा था, जिन्हें भगवान कृष्ण ने मुक्त कराया और आतंक से राहत दिलाई।
माँ काली की कथा: भारत की परंपराओं में यह माना जाता है कि इसी रात मां काली ने दुष्टों और आसुरी शक्तियों का संहार किया था। इसलिए यहाँ अंधकार पर प्रकाश की विजय के रूप में माँ काली और रक्षक शक्तियों की विशेष पूजा की जाती है।


















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